Varanasi News: स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों को बाहर खड़ा देखकर अभिभावकों को सूचना दी गई। अभिभावकों ने जब शिक्षकों को कॉल किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। आरोप है कि बराईं के प्राथमिक विद्यालय में ऐसा पहले भी हो चुका है।
चिरईगांव विकास खण्ड के ग्राम पंचायत बराईं के प्राथमिक विद्यालय में शनिवार को शिक्षकों के नहीं आने से मेन गेट का ताला ही नहीं खुला। नियमित समय से स्कूल आने वाले छात्र-छात्राएं काफी समय तक गेट पर बैठ कर शिक्षकों का इंतजार करते रहे।
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जब दस बजे तक कोई अध्यापक नहीं आया तब बच्चे निराश हो कर घर वापस लौट गए। जबकि शिक्षामित्र के साथ कुल आठ अध्यापक हैं। वहीं छात्रों की संख्या 129 है। ग्राम प्रधान पंकज गिरी की मानें तो अध्यापकों के समय से नहीं आने की शिकायत हमेशा रहती है। इस सम्बंध ने खण्ड शिक्षा अधिकारी चिरईगांव से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
उल्लेखनीय है कि चिरईगांव ब्लाक के शिक्षकों की मनमानी की कहानी कोई नई नहीं है। अभी बीते अप्रैल माह में निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों को मुस्तफाबाद न्याय पंचायत के संकुल से छितौना, मुस्तफाबाद रेता, बभनपुरा व सिंहवार सहित कई विद्यालयों के छात्रों से शिक्षकों ने चिलचिलाती धूप में पाठ्यपुस्तकों को धुलवाया जिसकी वीडियो वायरल होने पर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था।
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इस पर जिम्मेदार लोगों के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा। अब बराई में तैनात शिक्षकों की मनमानी का आलम यह है कि बगैर अवकाश के अवकाश पर हैं। सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी अभिभावकों से फोन पर बात करने को तैयार नहीं हैं।
इस बाबत, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अरविन्द कुमार पाठक ने बताया कि शनिवार को ललही छठ का त्योहार है। कुछ महिला शिक्षक व्रत रहती हैं ऐसे में उन्हें ढील देने के साथ हर हाल में विद्यालय खोलने व पठन-पाठन जारी रखने के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए थे। यदि विद्यालय बन्द है तो यह घोर लापरवाही है। प्रकरण में खण्ड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदारी हैं उनसे पूछताछ की जाएगी।