परमात्मा का नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि वह अमोघ शक्ति है जो मनुष्य के कई जन्मों के संचित पापों को नष्ट कर बिगड़े कार्यों को संवार देती है। भगवान जहां जीव को भवसागर से पार उतारते हैं, वहीं संत अपने सानिध्य और नाम-जप के माध्यम से भक्त को ईश्वर के चरणों तक पहुंचा देते हैं। यह उपदेश यथार्थ गीता के प्रणेता पूज्य स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने बुधवार को बरैनी चौराहा क्षेत्र में भक्तों को संबोधित करते हुए दिया। बुधवार की शाम जब स्वामी का काफिला परमहंस आश्रम शृंगवेरपुर से शक्तेषगढ़ आश्रम की ओर प्रस्थान करते हुए बरैनी चौराहा पहुंचा तो क्षेत्रीय श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े। एक भक्त के आवास पर अपने आराध्य संत के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आध्यात्मिक चर्चा के बाद स्वामी अड़गड़ानंद महाराज शक्तेषगढ़ आश्रम के लिए प्रस्थान कर गए। इस अवसर पर उनके साथ प्रमुख शिष्यों में नारद महाराज, संतोष महाराज, आशीष महाराज, सोहन महाराज और राकेश महाराज मुख्य रूप से उपस्थित रहे।