फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi: मणिकर्णिका चक्रपुष्करणी कुंड पर स्नान को लगा मेला, चार धाम के पुण्य की कामना से लगाई आस्था की डुबकी

Mon, 24 Apr 2023 06:06 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी के मणिकर्णिका तीर्थ स्थित चक्र पुष्करिणी कुंड पर स्नान की परंपरा का निर्वहन किया गया। पापों से मुक्ति व पुण्य फल की कामना से श्रद्धालुओं ने कुंड में डुबकी लगाई। 
विज्ञापन
चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चार धाम की यात्रा का पुण्य कमाने के लिए श्रद्धालुओं ने सोमवार दोपहर वाराणसी के मणिकर्णिका स्थित चक्रपुष्करणी तीर्थ में आस्था की डुबकी लगाई। पुण्य की कामना से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मध्याह्न मुहूर्त में स्नान किया। माता मणिकर्णिका से अखंड, सुख, सौभाग्य की कामना की और पूरा कुंड परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

विज्ञापन


सोमवार को मणिकर्णिका तीर्थ स्थित चक्र पुष्करणी कुंड पर स्नान की परंपरा का निर्वहन किया गया। पापों से मुक्ति व पुण्य फल की कामना से श्रद्धालुओं ने कुंड में डुबकी लगाई। मां मणिकर्णिका के श्रृंगार के बाद पुजारी परिवार ने माता का विशेष स्नान-अनुष्ठान के बाद विधि-विधान से श्रृंगार किया।

डमरू निनाद से माता के चरणों में श्रद्धा

माता की शोभायात्रा निकाली गई और प्रतिमा कुंड तक गई। मां मणिकर्णिका के विग्रह को चक्रपुष्करणी कुंड के मध्य विराजमान कराई गई। माता को स्नान कराने के बाद दोपहर 12:30 बजे प्रधान पुजारी जयेंद्र नाथ दुबे बब्बू महाराज ने मां मणिकर्णिका की आरती उतारी और विधि विधान से पूजन किया।
ये भी पढ़ें: ज्ञानवापी से जुड़े प्रकरण की तीन मई को होगी सुनवाई, 7 मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने की है मांग

विज्ञापन

वहीं दूसरी तरफ डमरू दल के लोगों ने डमरू निनाद से माता के चरणों में श्रद्धा अर्पित की। इसके बाद हर-हर महादेव के जयघोष के बाद सभी ने एक साथ कुंड के सिद्ध जल में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद तो पुण्य बटोरने के लिए स्नान करने वालों की होड़ लग गई। हर कोई कुंड में डुबकी लगाकर माता मणिकर्णिका से पुण्य की कामना कर रहा था।
विज्ञापन

एक साल के लिए सिद्ध हो जाता है कुंड का जल

पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि मणिकर्णिका माई के स्नान से तीर्थ कुंड का जल अगले एक वर्ष के लिए सिद्ध हो जाता है और इसी जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं के पाप दूर होते हैं। माना जाता है कि मणिकर्णिका मां की अष्टधातु की प्रतिमा प्राचीन समय में इसी कुंड से निकली थी। ढाई फीट ऊंची यह प्रतिमा वर्ष भर ब्रह्मनाल स्थित मंदिर में विराजमान रहती है। सिर्फ अक्षय तृतीया को दर्शन के लिए प्रतिमा कुंड स्थित 10 फीट ऊंचे पीतल के आसन पर विराजमान कराई जाती हैं। माता की शोभायात्रा मंदिर से कुंड तक निकाली जाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें