चैत्र नवरात्र की षष्ठी पर व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इसके साथ ही चैती छठ के महापर्व का समापन हो गया। भोर में भगवान सूर्य की पहली किरण के साथ ही छठ के अनुष्ठान शुरू हुए। घाट, कुंड और घरों की छत पर व्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके परिवार की सुख, समृद्धि और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। पूजन के साथ ही 36 घंटे के निराजल व्रत का समापन हो गया। पूजन के बाद व्रती महिलाओं ने व्रत का पारण किया और श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण भी किया।