बीएचयू में शुक्रवार को नेपाल के बदलते लोकतांत्रिक व्यवस्था पर तीन दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। केएन उडुप्पा सभागार में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि बीएचयू का नेपाल अध्ययन केंद्र अपने नए रूप में हमारे सामने आ रहा है। बीएचयू और नेपाल का बहुत गहरा रिश्ता रहा है। आज ऐसे सेंटर बनाने की जरूरत है कि जहां लोकतंत्र और दूसरे राजनीतिक विचारों पर अध्ययन किया जाए। संयोजक प्रो. अभिनव शर्मा ने कहा की नेपाल, नेपाली राज्य निर्माण की प्रक्रिया से गुजर रहा है। मुख्य वक्ता प्रो. एसडी मुनी ने कहा कि बनारस और बीएचयू ने नेपाल में लोकतंत्र की लड़ाई में बड़ा योगदान दिया है। लोकतंत्र कई जगह संविधान में वर्णित है, लेकिन वहां की संस्थाएं अत्यंत कमजोर हैं। डीन प्रो.अशोक कुमार उपाध्याय ने कहा कि लोकतंत्र को ज्यादा खतरा नेताओं कर्ताओं से नहीं बल्कि लोगों से है, क्योंकि वह लोग ही हैं जो खराब नेताओं को चुनते हैं। राजनीतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अमरनाथ मोहंती ने कहा कि नेपाल अध्ययन केंद्र फिर से नए रूप में उभर रहा है। सत्र के आखिर में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक नाथ ने किया। नेपाल के कृष्णा हाछेथु ने कहा कि नेपाल का संघवाद एक प्रकार से राजनीतिक समझौते का परिणाम है। डॉ. शंभू राम सिंह, प्रो. मीणा वैद्यमल ने विचार रखे।