चौबेपुर। चांदपुर रेतापार जंगल में चरवाहों को सिंदूरी रंग का एक संदिग्ध गोला दिखाई दिया। चरवाहों में शामिल एक बुजुर्ग ने बताया कि पहले जंगली सुअरों के शिकार के लिए इसी तरह की विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था, जो पैर पड़ते ही फट जाता था। पुलिस को सूचना दी गई। थाना प्रभारी इंद्रेश कुमार ने जांच की तो पता चला कि कोई विस्फोटक नहीं बल्कि एक पटाखा था, जिसका इस्तेमाल जंगली सुअरों को भगाने के लिए किया जाता है। चरवाहों ने उसे बम समझ लिया। संवाद