मऊ। मोबाइल और तीसरे व्यक्ति का दखल दांपत्य जीवन को काफी कमजोर कर रहा है। ये हम नहीं घरेलू मामलों के निस्तारण को लेकर गठित ऐच्छिक ब्यूरो के आंकड़े कह रहे हैं। मसलन 2019 से अब तक 1269 मामले दंपतियों के बीच में हुए विवाद को लेकर पहुंचे। इसमें से महज 314 मामलों में सदस्यों की काउंसिलिंग से दंपतियों ने आपसी गिले शिकवे भुलाकर पुन: एक साथ रहने को तैयार हुए।
दरअसल, घरेलू मामलों के विवाद के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए इस केस में कार्रवाई के बजाए काउंसिलिंग के माध्यम से मामले का अपने स्तर से ही निस्तारण को लेकर एक दशक पहले ऐच्छिक ब्यूरो की शुरुआत की गई। जबकि उससे पहले दंपतियों के बीच हुए घरेलू विवाद के मामले में पुलिस थानों में तहरीर ली जाती थी, ऐसे में बेहद पवित्र माने जाने वाले इस रिश्ते में आई दरार को पाटने के लिए यह शुरुआत काफी हद तक सकारात्मक रही।
सोशल मीडिया पर ज्यादा समय देना, रील बनाना भी वजह
ऐच्छिक ब्यूरो की सदस्य अर्चना उपाध्याय ने बताया कि पति-पत्नी का रिश्ता काफी नाजुक होता है। ऐसे में पुलिस पहले कार्रवाई की जगह इन्हें पूरी तरह से जोड़ने का प्रयास करती है। कोर्ट में मामले जाने से पहले ऐच्छिक ब्यूरो के सदस्यों के समक्ष दोनों पक्षों की बात को सुना जाता हैं। बताया कि पिछले छह वर्षों में 1269 मामले में ऐच्छिक ब्यूरो में आए। बताया कि अधिकांश मामलों के पीछे मोबाइल पर बात करना, मायके पक्ष का दखल या तीसरे किसी का दखल देना मुख्य कारण है। इसमें तो कई मामलों में सोशल मीडिया पर ज्यादा समय देना के साथ रील बनाने की वजह भी रिश्ते में खटास का कारण बन रहे हैं।
ऐच्छिक ब्यूरो के माध्यम से पुलिस विभाग बिखरते हुए रिश्तों को बचाने का प्रयास कर रहा है। विभाग घरेलू मामलों में कानूनी कार्रवाई के बजाए ब्यूरो के सदस्यों के माध्यम से काउंसिलिंग कराकर मामले का निस्तारण का प्रयास करती है, फिर भी मामला न निस्तारित होने पर पुलिस कानूनी कार्रवाई करती है। -इलामारन जी, एसपी मऊ
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वर्ष मामले सुलह मुकदमा
2024 170 28 17
2023 430 98 82
2022 277 57 57
2021 177 53 43
2020 89 15 20
2021 126 63 30