शिवपुर थाना अंतर्गत खुशहाल नगर निवासी मनीष सिंह के अनुसार वह दवा कंपनी में एमआर है। शाम को वह बाइक से कचहरी की ओर जा रहा था। नदेसर स्थित दूरदर्शन के पास पहुंचा था कि पीछे से आए बाइक सवार दो बदमाश बैग छीनकर वरुणा पुल की ओर भाग निकले। बैग में चेक बुक, बिल, दवाएं आदि थीं।
वाराणसी के नदेसर क्षेत्र में शनिवार की दोपहर बाइक टकराने पर विवाद में एमआर का बैग बाइक सवार दो युवक लेकर फरार हो गए। पीड़ित ने पीछा किया और कचहरी पुलिस चौकी पर सूचना दी। मगर, इस मामले में पुलिस ने सुनवाई नहीं की। इस मामले में डीसीपी वरुणा जोन ने लापरवाही बरतने पर चौकी इंचार्ज कचहरी विनोद कुमार मिश्रा को लाइन हाजिर कर दिया गया।
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शिवपुर थाना अंतर्गत खुशहाल नगर निवासी मनीष सिंह के अनुसार वह दवा कंपनी में एमआर है। शाम को वह बाइक से कचहरी की ओर जा रहा था। नदेसर स्थित दूरदर्शन के पास पहुंचा था कि पीछे से आए बाइक सवार दो बदमाश बैग छीनकर वरुणा पुल की ओर भाग निकले। बैग में चेक बुक, बिल, दवाएं आदि थीं।
कैंट इंस्पेक्टर प्रभुकांत के अनुसार लूट नहीं हुई है। नदेसर क्षेत्र के दूरदर्शन के पास जाम लगा था इस बीच एमआर मनीष और बाइक सवार सभईपुर निवासी दो युवक की बाइक टकरा गई। इससे बाइक सवार युवक के बाइक का मेडिगार्ड टूट गया। एमआर से वह सब साढ़े छह सौ रुपये नया मेडिगार्ड का पैसा मांगने लगे। इस पर दोनों के बीच विवाद हुआ और बाइक सवार दोनों युवक एमआर का बैग ले गए। पीड़ित का आरोप है कि चौकी इंचार्ज कचहरी विनोद मिश्रा के पास गए तो वह नदेसर का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। इस पर उन्हें लाइन हाजिर किया गया। चौकी इंचार्ज भोला मिश्रा को बनाया गया।
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आयरन मिल के कर्मचारी से 45 हजार की उचक्कागिरी
कछवारोड। धान बिक्री का 45 हजार लेकर आयरन मिल जाते वक्त कर्मचारी से चार पहिया वाहन में शनिवार दोपहर उचक्कागिरी हो गई। दोनों घटनाओं की पुलिस तफ्तीश कर रही है।
मिर्जापुर के जमुआरी गांव निवासी पीड़ित सूर्यबली भारती के अनुसार वह रोहनिया स्थित शहबाबाद स्थित आयरन मिल में कर्मी है। धान बिक्री को लेकर कछवारोड आया। यहां बिक्री के 45 हजार रुपये लेकर मिल के लिए निकला। सड़क पर आते ही शहाबाबाद जाने के लिए चार पहिया वाहन को हाथ देकर रुकवाया। पीड़ित सूर्यबली का आरोप है कि कुछ दूर जाने पर वाहन में सवार युवकों ने उसका पैसा धोखे से निकाल लिया। मिर्जामुराद थाना प्रभारी राजीव सिंह के अनुसार मामला संदिग्ध है, गाड़ी का नंबर भी पीड़ित को याद नहीं है।