विज्ञान और प्रौद्योगिकी में जापान की ताकत का लोहा पूरी दुनिया मानती है मगर इसके इतर भी जापान के पास दुनिया को बताने और दिखाने के लिए काफी कुछ है। भारत की तरह जापान भी कला और संस्कृति के क्षेत्र में काफी समृद्ध है। जापान की इसी सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत से युवा पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए बीएचयू ने पहल की है। जल्द ही विश्वविद्यालय में भारत-जापान दोस्ती के रंग चटख होते दिखेंगे।
जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे के वाराणसी दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ ही सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी सिलसिला शुरू हुआ है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय जापान की प्राचीन पॉटरी आर्ट ‘राकू’ की कार्यशाला के आयोजन की तैयारी में जुटा है। इस कार्यशाला में शामिल विद्यार्थी न केवल जापान की पांच सौ साल पुरानी कला से रूबरू होंगे बल्कि उन्हें जापानी पात्र (पॉट) तैयार करने का मौका भी मिलेगा। यह कार्यशाला दृश्य कला संकाय में प्लास्टिक आर्ट विभाग के पॉटरी सेरामिक सेक्शन के तहत आयोजित होगी।
पॉटरी सेरामिक सेक्शन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार ‘राकू’ जापान की 14वीं शताब्दी की कला है। उस दौर में जापान में चाय पार्टी (टी सेरेमनी) का प्रचलन ज्यादा था। मेहमानों को मिट्टी से तैयार ताजे पात्र (पॉट) में ही चाय परोसी जाती थी। इस पार्टी में जो भी पात्र इस्तेमाल होता था, उसे राकू पात्र कहा जाता था। बताया कि बीएचयू के बीएफए और एमएफए के विद्यार्थियों को जापान की इस ऐतिहासिक पात्र कला से वाकिफ कराने के लिए कार्यशाला की तैयारी है।
पांच दिवसीय कार्यशाला में दिल्ली ब्लू पॉटरी के वरिष्ठ कलाकार राजेश श्रीवास्तव की देखरेख में विद्यार्थी राकू पात्र (कप, प्लेट, कटोरा, केटली, गुलदस्ता और मर्तबान) बनाना सीखेंगे। कार्यशाला दृश्य कला संकाय के डीन प्रो. हीरालाल प्रजापति और मूर्तिकला विभाग के प्रमुख विनोद सिंह की देखरेख में होगी।