अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने पहली बार मृदा हॉटस्पॉट की पहचान की है। इसमें मृदा पारिस्थितिक गुणों के संरक्षण को जरूरी बताया गया है। खास बात यह है कि इस अध्ययन समूह में बीएचयू के पर्यावरण एवं संपोष्य विकास संस्थान के प्लांट माइक्रो इंटरेक्शन लेबोरेटरी के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश वर्मा और उनके शोध छात्र अपर्ण मुखर्जी भी शामिल हैं।
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अध्ययन में सभी महाद्वीपों से 23 देशों से लिए गए मिट्टी के 615 नमूनों के भीतर जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के संकेतकों के 10,000 से अधिक अवलोकनों का सर्वेक्षण किया गया। इसका प्रकाशन वैश्विक विज्ञान पत्रिका नेचर में हुआ है।
विश्व में पहली बार मृदा हॉटस्पॉट की पहचान
डॉ. जयप्रकाश ने बताया कि मृदा पारिस्थितिक गुणों के संबंध में विश्व में पहली बार मृदा हॉटस्पॉट की पहचान हुई है। इस अध्ययन में मृदा पारिस्थितिक गुणों के संरक्षण के लिए हॉटस्पॉट को मान्यता दी गई है।
इस बात पर जोर दिया गया है कि मृदा प्रकृति संरक्षण योजना को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। ताकि तेजी से बदलती वैश्विक जलवायु में मृदा पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं और इसकी उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके।