आईएमएस बीएचयू के प्रोफेसर एसपी शर्मा ने बताया कि पहली बार जब बच्चे की सर्जरी हुई थी तब 5 दिन की ही थी। पहली सर्जरी में उसका तीसरा पैर काटकर अलग कर दिया गया था। पेट के पास से ही मल निकलने का रास्ता बनाया गया था।
उन्होंने बताया कि दूसरी सर्जरी में गर्भाशय, मूत्राशय के साथ ही अन्य अंगों को सही प्रकार से बनाया गया। चार महीने बाद तीसरी सर्जरी करके उसका गुदाद्वार बनाया जाएगा। उसके बाद किसी तरीके की कोई परेशानी नहीं होगी। जब भी किसी बच्चे के तीन पैर होते हैं तो वह पैरासिटिक ट्विन होता है और उसे कई दूसरे अंगों का विकास नहीं हो पाता है।