भक्तमाल कथा में भगवान के भक्तों के चरित्रों को सुनना और उनके व्यवहार, गुण और भावों को समझकर अपने जीवन में उतारने से भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह कथाएं भक्तों के जीवन की घटनाओं से प्रेरणा देती हैं और आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक होती हैं, जो कि अनन्य भक्ति और तृष्णा रहित जीवन जीने की सीख देती हैं। ये बातें वृंदावन से पधारे कथा व्यास गोरीलाल कुंज श्रीधाम के महंत स्वामी किशोरदास देव ने कहीं। वह रविवार को श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय दुर्गाकुंड में संकटमोचन संकीर्तन मंडल की ओर से आयोजित भक्तमाल कथा के समापन समारोह में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्तों के चरित्र का श्रवण करने से भक्तों के जीवन में साधना का बल और दृढ़ता आती है, जिससे लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती है। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ का पूजन व आरती शिवकुमार एवं अखिलेश खेमका ने किया। इस अवसर पर विजय कुमार मिश्र, नीरज दुबे, श्वेता अग्रवाल, विवेक अग्रवाल,आर के पांडेय उपस्थित थे।