वाराणसी। कैंट स्थित उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन के क्षेत्रीय प्रबंधक के कार्यालय से बृहस्पतिवार को एंटी करप्शन की टीम ने एक कनिष्ठ लिपिक को 50 हजार रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा। लिपिक की पहचान बलिया जिले के उभांव थाना क्षेत्र के फरसातार गांव निवासी रियाजुद्दीन अहमद के रूप में हुई है। रियाजुद्दीन के साथ ही क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा के खिलाफ सिगरा थाने में एंटी करप्शन की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मिर्जापुर जिले के हलिया थाना क्षेत्र के अहुंगी कलां निवासी रमेश कुमार सिंह ने एंटी करप्शन की वाराणसी यूनिट से शिकायत की थी। रमेश ने एंटी करप्शन को बताया कि वह संविदा चालक हैं। उनका स्थानांतरण चंदौली से विंध्य नगर डिपो कर दिया गया था। पिता की बीमारी के कारण स्थानांतरण रद्द कराने के लिए उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश दिया।
रमेश का आरोप है कि उनकी ज्वाइनिंग कराने के लिए क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा के कहने पर रियाजुद्दीन ने उनसे 50 हजार रुपये की घूस मांगी। उन्होंने रुपये देने में असमर्थता जताई तो उनकी ज्वाइनिंग में हीलाहवाली की जाने लगी। इस पर वह एंटी करप्शन के ऑफिस गए और शिकायत की। एंटी करप्शन की टीम ने उन्होंने बृहस्पतिवार की दोपहर दो बजे क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय जाकर रियाजुद्दीन को केमिकल लगे हुए नोट देने को कहा। इस क्रम में रमेश 50 हजार रुपये लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक के कार्यालय पहुंचे। लेखा अनुभाग के सामने की गैलरी में रियाजुद्दीन से बात करते हुए उसे 50 हजार रुपये थमाए। उसी दौरान एंटी करप्शन की ट्रैप टीम के प्रभारी मैनेजर सिंह के नेतृत्व में इंस्पेक्टर नीरज कुमार सिंह व राकेश बहादुर सिंह और हेड कांस्टेबल शैलेंद्र राय व विशाल उपाध्याय की टीम ने रियाजुद्दीन को पकड़ लिया। इसके बाद उसे सिगरा थाने ले जाया गया।
रियाजुद्दीन ने कहा कि उसे फंसाया गया है। उसे क्षेत्रीय प्रबंधक ने चालक से रुपये लेकर रखने को कहा था। उधर, क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा ने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। वह शिकायत करने वाले चालक को जानते भी नहीं हैं।