बारिश के बावजूद महाशिवरात्रि पर सोमवार की रात काशी में निकली अनूठी शिव बारात में भूत प्रेत भी नजर आए और अड़भंगी मस्त बाराती भी। इसमें अमेरिका, फ्रांस समेत कई देशों के पर्यटक विविध वेश में बाबा के बाराती बनकर निकले। साहित्यकार पं. धर्मशील चतुर्वेदी के सिर पर दूल्हे का सेहरा सजाया गया तो दूल्हन बने पूर्व रणजी खिलाड़ी जावेद अख्तर। हास्य कवि सांड बनारसी ने सहबल्ला के रूप में बनारस की संस्कृति को जीवंत किया। इस बार की बारात काशी बनाओ... के नारे पर केंद्रित थी।
शाम साढ़े सात बजे मैदागिन चौराहे के पास से रथों, बग्घियों और घोड़ों से सुसज्जित बारात निकली। दुनिया के सबसे बड़े चेस बैंक के वाइस प्रेसीडेंट अशोक तुलस्यान भी इस बारात में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। काशी की बदहाली, टूटी सड़कें और भविष्य की नई काशी पर आधारित झांकी हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। बारात देखने के लिए लोग छतों, बारजों से लेकर सड़क की दोनों पटरियों पर लोग जमा थे।दुर्गा, काली, हनुमान और राम, लक्ष्मण के वेश में लाग भी बारात में शामिल हुए।
बांसफाटक,गोदौलिया से दशाश्वमेध तक रास्ते भर गुलाब, गेंदा के फूलों के साथ गुलाल भी उड़ाए गए। बारातका संचालन दिलीप सिंह, जगदंबा तुलस्यान और कैलाश केसरी ने किया। इसके अलावा लक्सा स्थित लाल कुटी व्यायमाशाला के अलावा तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर से भी बाबा की भव्य बारात निकाली गई। उधर रामनगर में शास्त्री चौक से शिव भक्तों ने गाजे बाजे के साथ शिव बारात निकाली। जगह-जगह श्रद्धाओं द्वारा शिव बारात की आरती उतार कर पुष्प वर्षा की गई।
जब बारात साहित्यनाका मोड़ तक पहुंची तभी जोरदार बारिश शुरु हो गई। इसके बावजूद भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। राकेश जायसवाल, राजेंद्र गुप्ता, रंगनाथ पांडेय, कृष्ण चंद्र, अशोक जायसवाल, राजाराम यादव, पारस नाथ, लवकुश गुप्ता, गणेश प्रसाद, विनोद गुप्ता, सीबी पांडेय आदि लोग मोजूद रहे।