आयुष्मान गोल्डन कार्ड अगर आपके पास है तो आपका सरकारी, निजी अस्पतालों में जांच के साथ ही सर्जरी सहित अन्य सुविधाओं के लिए पैसे नहीं खर्च करने होंगे। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए अभियान चलाकर शासन-प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले में करीब 50 हजार लोगों को आयुष्मान कार्ड नहीं मिल पाया है। कार्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद लोग सीएमओ कार्यालय स्थित आयुष्मान के कार्यालय पर जानकारी के लिए पहुंच रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सरकार की ओर से तय कंपनी की स्वीकृति न होना प्रमुख वजह है।
मरीजों को जरूरत पड़ने पर बेहतर इलाज मिल सके, इसके उद्देश्य से ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी वजह से बहुत सारे लोग इलाज नहीं करा पा रहे हैं।
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सात लाख कार्ड बनाया जाना बाकी
जिले में 307226 परिवार के सदस्यों का कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष 203947 परिवारों का एक कार्ड बन गया है। मानक के अनुसार एक परिवार में कम से कम 3 से 4 सदस्यों को कार्ड बनना है। ऐसे में कुल 1282440 कार्ड बनाए जाने हैं, जिसमें से 506419 कार्ड जारी हो चुके हैं। ऐसे में जिले में अभी कुल सात लाख लोगों के कार्ड बनने बाकी हैं। पिछले साल नवंबर 2022 से फरवरी 2023 तक करीब 1.60 लाख लोगों ने कॉमन सर्विस सेंटर सहित अन्य माध्यमों से कार्ड के लिए आवेदन किया है। इसमें से करीब 50 हजार लोगों के आवेदन की स्वीकृति के लिए नामित कंपनी ने अब तक स्वीकृति जारी नहीं की है।
केस-1
रविंद्रपुरी निवासी 49 वर्षीय एक मरीज ने गोल्डन कार्ड के लिए जनवरी के अंतिम सप्ताह में आवेदन किया था। इसके बाद कार्ड के लिए केवाईसी मांगी गई। संबंधित व्यक्ति ने केवाईसी की प्रक्रिया भी पूरी की। अब तक कार्ड नहीं मिल सका। सीएमओ कार्यालय जाने पर पता चला कि संबंधित कंपनी की स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
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केस-2
सीएमओ आफिस आए एक व्यक्ति जिसने अपनी छह साल की बेटी के नाम पर गोल्डन कार्ड आवेदन किया था। प्रक्रिया पूरी भी की। जब कार्ड नहीं मिल सका तो सीएमओ कार्यालय गए। यहां जांच के बाद संबंधित कंपनी की स्वीकृति न होने की जानकारी मिली। बताया कि बिटिया की तबीयत खराब थी। इलाज नहीं हो सका। उसकी मृत्यु हो गई। मौत के दस दिन बाद गोल्डन कार्ड आया।
गोल्डन कार्ड का आवेदन करने वाले जिन लोगों को कार्ड नहीं मिल पाया है, उनकी समस्या के बारे में संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों से बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। जो भी लोग पात्र हैं, नियमानुसार सभी को गोल्डन कार्ड दिलवाना विभाग की प्राथमिकता है। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ