गंगा पार रेती पर टेंट सिटी बनाने के मामले की सुनवाई गुरुवार को एनजीटी नई दिल्ली में हुई। एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए.सेंथिल वेल की पीठ के समक्ष जुर्माने की राशि कम करने के पुनर्विचार आवेदन पर आपत्ति जताई गई।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पूछा कि यही बता दीजिए कि कछुआ कैसे शिफ्ट हुए? ऐसा तो नहीं कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कछुआ अभयारण्य की अधिसूचना को रद्द कर दिया और कछुए बोले चलो भदोही। भदोही पहुंच भी गए।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन अगस्त को एनजीटी के समक्ष रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें जिलाधिकारी वाराणसी के रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि टेंट सिटी मौजा कटेसर जनपद चंदौली में बनाया गया था। लिहाजा, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति 17. 12 लाख रुपये हर टेंट कंपनी ( प्रवेग कम्युनिकेशन एवं निरान टेंट कंपनी) से वसूली का अधिकार चंदौली को दिया जाए।
जिलाधिकारी वाराणसी ने नोटिस वापस कर दिया है। वहीं, सदस्य सचिव यूपीपीसीबी ने 26 जुलाई को जिलाधिकारी चंदौली को पत्र लिखकर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि दोनों टेंट कंपनियों से वसूलने का अनुरोध किया है।