काशी विद्यापीठ के ललित कला केंद्र में लगाई गई लखनऊ के चित्रकारों की प्रदर्शनी देखते लोग। अमर उज
- फोटो : जिला स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए पंत स्टेडियम में बनाई जाती रंगोली।
काशी विद्यापीठ ललित कला विभाग में लखनऊ विवि और अतुल्य भारत ग्रुप की ओर से 10 दिवसीय कला प्रदर्शनी का सोमवार को शुभारंभ हुआ। इस दौरान 42 कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों, मानव जीवन पर आधारित कलाकृतियों के साथ ही अलग-अलग विषयों से जुड़े चित्रों को दर्शाया। बीएचयू दृश्य कला संकाय प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित ने इस तरह की प्रदर्शनी को ललित कला के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ के अध्यक्ष एवं ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि प्रदर्शनी में 42 कलाकारों की 46 चित्र एवं दो मूर्ति प्रदर्शित की गईं। डॉ. रास बिहारी शाह ने अपने चित्र में दिखाया कि मनुष्य हमेशा एक जैसा नहीं रह सकता। साथ ही म्यूरल चित्र भी बनाया। इसमें गणेश जी से वेदव्यास महाभारत की कल्पना को साकार करते हुए दर्शाया है। अंकिता चौधरी ने विचार रखे। प्रदर्शनी में प्रीति कुमारी ने चित्रों से यह बताया है कि मनुष्य की इच्छाएं कभी पूर्ण नहीं होती हैं वह सोचकर अपने मन ही मन में इच्छाओं को घोट देता है। गौरव कुमार ने शिव का गंगा अवतरण का दृश्य को व्यक्त करने का प्रयास किया। प्रो. मंजुला चतुर्वेदी, प्रो. अनुराग कुमार, डॉ. सुनील कुमार सिंह कुशवाहा, डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. राम राज मौजूद रहे।
काशी विद्यापीठ के ललित कला केंद्र में लगाई गई लखनऊ के चित्रकारों की प्रदर्शनी देखते लोग। अमर उज- फोटो : जिला स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए पंत स्टेडियम में बनाई जाती रंगोली।