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Varanasi News: दर्शन पूजन के बाद ही कारीगर तैयार करेंगे तंदूल महाप्रसाद

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विजयदशमी से बाबा के धाम में बिकना शुरू हो गया नया प्रसाद
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पुराणों के आधार पर निर्मित हुआ प्रसाद, 120 रुपये में मिल रहे हैं छह लड्डू
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम में विजयदशमी से प्रसाद की व्यवस्था बदल गई। शनिवार को मंदिर के काउंटर से मंदिर न्यास के अपने प्रसाद तंदूल महाप्रसाद की बिक्री शुरू हो गई है। बाबा विश्वनाथ को प्रसाद चढ़ाकर इसे प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। कारीगर नहाने और पूजन करने के बाद ही बाबा का यह प्रसाद तैयार करेंगे।
पुराणों के अध्ययन के आधार पर न्यास ने इस प्रसाद के निर्माण को हरी झंडी दी है।शनिवार को विजयदशमी पर तंदूल महाप्रसाद का भोग श्री काशी विश्वनाथ जी की भोग आरती में अर्पित किया। इसके बाद मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने प्रसाद खरीदकर इसकी शुरुआत की। न्यास ने सभी गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए सनातन, शास्त्रीय एवं परंपरागत मान्यताओं का समावेश कर यह विशिष्ट प्रसाद तैयार करवाया है।
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श्री काशी विश्वनाथ ट्रस्ट ने प्रसाद निर्माण के लिए बनास डेयरी (अमूल) से समझौता किया है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध करवाई गई रेसिपी का प्रसाद बनास डेयरी अपनी पिंडरा स्थित फैक्ट्री में निर्मित करा रहा है। एक मशीन लाइन तंदूल महाप्रसाद के लिए भी रखी गई है। बनास डेयरी द्वारा प्रसाद के लिए सभी सर्टिफिकेशन और एफएसएसएआई के मानकों के अनुसार सर्टिफिकेशन करवा लिए गए हैं तथा इसके सभी टेस्टिंग के मानक पूर्ण करने के बाद प्रसाद का निर्माण प्रारंभ किया गया है।
न्यास द्वारा फैक्ट्री की सीसीटीवी सर्विलांस की फीड, कार्मिकों के सनातनी परंपरा की पृष्ठभूमि, सनातन धर्म में श्रद्धा को प्रमुख रूप से लागू किया गया है। इसके साथ ही प्रसाद निर्माण करने वाले शिवजी के दर्शन के पश्चात ही प्रसाद निर्माण की प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। ट्रस्ट व बनास डेयरी के समझौते के नियमों में इसे शामिल किया गया है।

हाइजीन के मानकों की होगी मॉनिटरिंग
प्रसाद निर्माण के लिए उच्चतम हाइजीन के मानकों की मॉनिटरिंग की जाएगी। इसकी निर्माण सामग्री, पोषण, कैलोरी तथा सेल्फ लाइफ आदि जानकारी बाहरी डिब्बे पर दी जाएंगी। बनास डेयरी की विनिर्माण फैसिलिटी में उत्पादित प्रसाद किसानों के सहकारी क्षेत्र के ही मार्केटिंग फेडरेशन अमूल के नेटवर्क के माध्यम से वितरित किया जाएगा। इसका विक्रय केवल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित अमूल के विशेष काउंटरों के माध्यम से ही होगा।
पुराणों के अध्ययन के बाद तैयार हुआ महाप्रसाद
काशी और देश के कई जाने-माने विद्वानों द्वारा अलग-अलग शास्त्रों, पुराणों व ग्रंथों का अध्ययन किया गया और उसमें भगवान शिव को प्रिय, चढ़ाई जाने वाली प्रसाद स्वरूपी वस्तुएं चिह्नित की गईं। जिन ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन किया गया है उनमें शिव महापुराण, शिवर्चना चंद्रिका, वीर मित्रोदय:, लिंग पुराण, स्कन्द पुराण आदि सम्मिलित हैं। इन सबके सार के रूप में तंडुल, अक्षत या चावल का प्रसाद शिव जी को अर्पित करना सर्वोत्तम बताया गया है।
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प्रसाद बनाने वाली कंपनी की समय सीमा अगस्त में हो गई थी समाप्त
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि मंदिर में लड्डू महाप्रसाद बनाने वाली संस्थाओं का अनुबंध 31 अगस्त को ही समाप्त हो गया था। उनको पहले से ही जानकारी भी दे दी गई थी। बीच में 15 सितंबर तक लड्डू प्रसाद तैयार करने की समय सीमा बढ़ाई गई थी।
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