महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ में दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर संगोष्ठी में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व की चर्चा की। मुख्य अतिथि शहर दक्षिणी के भाजपा विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि जनसंघ से जुड़कर पं. दीनदयाल ने भारतीय विचारधारा को एक नई दिशा प्रदान की। उनका अंत्योदय, एकात्म मानववाद ही विकसित भारत की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल मानते थे कि नीतियां और योजनाएं तभी सफल कहलाएंगी, जब वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को जीवन जीने का आत्मविश्वास दें। वर्तमान सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं की आधारशिला पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन व चिंतन पर ही आधारित हैं। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि यह विकास या शासन व्यवस्था निश्चित ही देश के महान विभूतियों की देन है। जिनके दिखाए मार्ग पर हम विश्व गुरु बनने का हौसला रखते हैं। भाषीय, जातीय आधार पर भारत का विभाजन किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन शोध पीठ के निदेशक प्रो. केके सिंह, संचालन डॉ. ऊर्जस्विता सिंह और धन्यवाद ज्ञापन शोधपीठ की उप-निदेशक प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने किया।