गौरा ऊपरवार रोड स्थित हनुमान जी मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा वाचक कृष्णा शरण महाराज ने सरल और सहज भाव में सुखदेव के जन्म के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वे जन्म से ही विरक्त और ज्ञानी थे, जिन्होंने संसार के मोह-माया को त्याग कर भक्ति और ज्ञान का मार्ग अपनाया। राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि द्वारा दिए गए श्राप का प्रसंग भी सुनाया गया। कहा कि क्रोध और अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं, इसलिए जीवन में धैर्य और संयम बेहद जरूरी है। आरती के साथ कथा को विराम दिया गया। इस मौके पर भोलानाथ उपाध्याय, शरद उपाध्याय, अतुल चतुर्वेदी, प्रदीप सोनी, अजय गुप्ता मौजूद रहे। संवाद