काशी विश्वनाथ मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देते कलाकार। स्रोत मंदिर प्रशासन
शारदीय नवरात्र पर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में जारी नौ दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन पूरा परिसर अध्यात्म और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। मंगलवार की सुबह वैदिक ब्राह्मणों ने विधि-विधान के साथ अनुष्ठान आरंभ किया, जिसके उपरांत 11 आचार्यों द्वारा दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ किया गया। परंपरानुसार तीसरे दिन भी देवाधिदेव महादेव को अर्पित करने के बाद माता विशालाक्षी व भगवती चंद्रघंटा के लिए शृंगार और नैवेद्य सामग्री धाम से प्रस्थान कराई गई। डमरुओं की गूंज और शंख की मंगल ध्वनि के बीच हर-हर महादेव और जय माता दी के जयकारों के साथ यह पावन भेंट आदिशक्ति के दरबार में पहुंचाई गई। सूर्यास्त के बाद धाम स्थित शंकराचार्य चौक कला और साधना के संगम का साक्षी बना। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ बसाक बहनों और उनके दल ने भावपूर्ण भजनों से किया। इसके बाद वसुंधरा शर्मा की नयनाभिराम नृत्य प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। मंच पर गायक अमलेश शुक्ल और आस्था ने शिव-शक्ति की स्तुतियों से समा बांधा।
काशी विश्वनाथ मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देते कलाकार। स्रोत मंदिर प्रशासन