डाफी स्थित कमला आर्शीवाद वाटिका में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान सोमवार को देवी उपाशिका साध्वी गीतांबा ने कथामृत का पान करवाया। कहा कि वेद पुराण के रचयिता महर्षि मेनन व्यास एक बार आराधना में बैठे थे। इसी दौरान एक गौरैया का जोड़ा अपने बच्चों को खाना खिला रहा था। यह देखकर उनको संतान न होने का बहुत दुख हुआ। सरस्वती नदी के किनारे आराधना में बैठे महर्षि वेदव्यास को चिंतित देखकर वहां से गुजर रहे महर्षि नारद ने इसका कारण पूछा। महर्षि वेदव्यास ने कहा कि संतान नहीं होने से वह दुखी है। इस पर नारद जी ने उन्हें श्रीमद् देवी भागवत का पारायण करने को कहा। उन्होंने श्रीमद्देवी भागवत का पारायण किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां प्रकट हुईं और उनको संतान प्राप्ति का वरदान दिया। मां की कृपा से उन्हें शुकदेव जैसा पुत्र प्राप्त हुआ। साध्वी गीतांबा ने कहा कि मां प्रसन्न हो जाएं तो वह भक्तों को सभी सुखों को देती हैं।