मुहर्रम की तीसरी तारीख बुधवार को तीन जुलूस उठाए गए। दो सौ सालों से उठ रहे कदीमी इन जुलूस में जियारत करने के लिए भीड़ उमड़ा रहा। मजलिस और मातम के साथ कर्बला के शहीदानों के प्रति अकीदत पेश की। शिवाला में मंदिरनुमा ताजिये का जुलूस उठाकर हरिश्चंद्र घाट पर स्थापित किया गया।
अंजुमनों ने रवायत को निभाते हुए दुलदुल का कदीमी जुलूस औसानगंज नवाब की ड्योढ़ी से शाम को उठाया गया। मेहंदी बख्त के संयोजन में उठे जुलूस में अंजुमन जवादिया पितरकुंडा तथा अंजुमन हुसैनिया के नौहाख्वानों ने नौहा मातम किया। प्रो. अजीज हैदर ने मजलिस को खिताब किया। यूसुफ साहब परिजनों ने सवारी पेश किया। जुलूस लोहटिया, काशीपुरा, नारियल बाजार, चौक, दालमंडी, नई सडक, कालीमहाल होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचकर ठंडा हुआ। शिवाला स्थित आलिम हुसैन रिजवी के इमामबाड़े से मंदिर नुमा ताजिये का जुलूस उठा। अंजुमन गुलजारिया अब्बासिया ने नोहा मातम पेश किया। जो परंपरागत मार्गों से होते हुए हरिश्चंद्र घाट के पास कुम्हार के इमामबाड़े पहुंचा, जहां पर अकीदतमंदों ने मन्दिरनुमा इस ताजिये को अकीदत के साथ स्थापित किया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता फरमान हैदर ने बताया कि रामनगर में सगीर के इमामबाड़े से अलम का जुलूस उठाया गया। अंजुमन मुहाफिज अजा ने नोहा मातम किया। जबकि शहर के विभिन्न इलाकों में मजलिस का आयोजन हुआ। चौथी मोहर्रम को शहर में चार जुलूस उठाए जाएंगे।