हरिश्चंद्र घाट पर बने गैस आधारित शवदाह गृह में लगी दो मशीनों में एक खराब है। नगर निगम की ओर से संचालित शवदाह गृह में हिंदू परंपरा के कारण लोग शव जलाने से कतराते हैं। अमूमन यहां पर प्रतिदिन तीन से चार शवों का दाह संस्कार किया जाता है।
यहां रहने वाले राकेश कुमार ने बताया कि हिंदू परंपरा के चलते लोग इसमें कम जलाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह बहुत अच्छा है। एक शव जलाने के एवज में 500 रुपये लिए जाते हैं। जबकि लकड़ी पर शव जलाने में कम से कम 8 से 10 हजार रुपये लग जाते हैं। बाहर से आने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर लोग यहां शवों को जलाते हैं। कोरोना काल में मशीन से शवदाह करने वालों की लाइन लग गई थी। उस समय शवों को जलाने के लिए टोकन नंबर दिया जाता था। उस दौरान शव जलाने वालों का नंबर एक से दो दिन में आता था। इस समय यहां कोई भीड़ नहीं है।