वाराणसी। रुपये की कीमत में लगातार आ रही गिरावट और डालर के मजबूत होने से निर्यातक, उद्यमी और व्यापारी घबराए हुए हैं। वे सही निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। पूर्वांचल में 40 फीसदी से अधिक इकाइयां पेट्रोलियम पदार्थो पर आधारित हैं। इनके दाम बढ़ने से उत्पादों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। साथ ही महंगाई का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। संकट की इस घड़ी में निर्यातकों को क्षणिक फायदा जरूर हो रहा है पर बनारसी वस्त्र कारोबार पर इसका गंभीर असर पड़ा है। रेशम के दाम पिछले दो महीने में लगभग 900 रुपये प्रति किलो बढ़ गए हैं। जून के अंत में रेशम की कीमत 3300 रुपये प्रति किलो थी। जो अब बढ़कर 4200 रुपये हो गई है। रेशम कारोबारी मोहन लाल सरावगी का कहना है कि बनारसी वस्त्रों के उत्पादन लागत में 30 फीसदी का इजाफा हो गया है। इससे खरीददार बाजार में नहीं हैं। विदेशों से भी आर्डर नहीं मिल रहा है। अशोक कुमार गुप्ता का कहना है कि रुपये में गिरावट से निर्यातक और उद्यमी घबराए हुए हैं। विदेशी निवेशक भी हाथ खींचे हुए हैं। इससे कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है। निर्यात के आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। उद्यमी रमेश कुमार चौधरी का कहना है कि सभी उद्योग इससे प्रभावित हैं। उत्पादों क ी लागत लगभग 20 से 25 फीसदी तक बढ़ गई है। बिक्री न होने से सभी इकाइयों में माल डंप पड़े हुए है। पेट्रोल और डीजल के दाम इधर बीच पांच से छ: रुपये लीटर तक बढ़ गए हैं।