सुरियावां। नगर के नेतानगर में किसानों की मंगलवार को बैठक हुई। इसमें छह दशक से जमीनों की चकबंदी न होने पर चिंता जताई गई। कहा कि इससे भूमाफिया सार्वजनिक और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा किए हैं। सीएम को पत्र भेजकर चकबंदी के लिए पहल करने की गुजारिश की गई। किसानों ने कहा कि जिले में 1962 में पहली बार चकबंदी हुई थी, करीब छह दशक के बाद परिवारों की जमीन दस टुकड़ो में बंट गई पर अब तक चकबंदी नहीं हो सकी। 1962 में जब चकबंदी हुई थी तब एकमात्र तहसील थी लेकिन अब तीन तहसीलें जिले में है। पूर्व प्रधान डॉ. रंगनाथ शुक्ला ने कहा कि पड़ोसी जिले इलाहाबाद के हंडिया और फूलपुर तहसील में 2008 के बाद दोबारा चकबंदी हो रही है। चकबंदी न होने से सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जे है, गावो में स्कूल, खलिहान, खेलकूद के मैदान, घूर गढ्ढा आदि पर भी भू माफिया कब्जा कर रखे हैं। पंडित शेषधर पांडेय ने कहा कि चकबंदी होने से छोटे-छोटे खेत के टुकड़े एकत्रित हो जाएंगे। इससे किसानों को सहूलियत होगी। छोटे खेत होने से न तो उसकी ठीक से जुताई हो पाती है और न ही सिंचाई। किसान दिनेश चंद्र उपाध्याय, दीनानाथ मिश्र, रामधारी सिंह, सत्यदेव यादव, शेर बहादुर सिंह, सुनील सिंह, रमेश शुक्ल, मनोज शुक्ल, मुकेश सिंह, राकेश सिंह, मूलचंद, राजाराम मौर्य ने सीएम से मांग किया कि जल्द चकबंदी को प्रभावी किया जाए।