बीएचयू के मनोविज्ञान विभाग में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वदेशी प्रथाओं और मनोवैज्ञानिक नवाचारों के बीच दूरियों को कम करने पर सहमति जताई गई। बताया गया पारंपरिक इलाज कई बार आज के मानसिक स्वास्थ्य के कई प्रमुख मॉडलों से भी बेहतर हैं। इस बात के समर्थन में 90 से ज्यादा शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एप्लाइड साइकोलॉजी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में व्याख्यान और पोस्टर प्रस्तुतियां दी गईं। अबू धाबी यूनिवर्सिटी, यूएई की डॉ. श्रीति नायर ने उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ती मानसिक कल्याण की चिंता को लेकर अवगत कराया। प्रो. सुरेंद्र कुमार और प्रो. सोनिया सचडे द्वारा आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि एआई का इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील होता है।