सीतामढ़ी। गंगा में तेजी से बढ़ाव जारी है। 24 घंटे में एक मीटर की दर से जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार की शाम 73 मीटर गंगा का जलस्तर रिकार्ड किया गया। जलस्तर बढ़ने से सारे स्नान घाट डूब गए हैं और परवल की फसल जलमग्न हो गई है। कटान भी शुरू हो गई है, जिससे तटवर्ती इलाके के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। महज एक सप्ताह में ही गंगा के जल स्तर में भारी बढ़ोत्तरी हो गई। रविवार शाम से जल स्तर का बढ़ाव एक से दो सेंटीमीटर प्रति घंटे हो रही है। बढ़ते जल स्तर ने गंगा तटीय लोगो की नींद उड़ दी है। केंद्रीय जल आयोग ने शनिवार की शाम 72.162 मीटर जलस्तर दर्ज किया था, जो रविवार की शाम 73 मीटर पहुंच गया। इलाके के सभी स्नान घाट डूब चुके हैं। सीतामढ़ी में गंगा का पानी पक्के घाट और यज्ञ मंडप के नजदीक पहुंच गया। प्रति घंटे छह सेंटीमीटर की रफ्तार से जलस्तर बढ़ने से कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा सहित इटहरा, बनकट, आदि गावों में कटान होने लगी है, जिससे किसान चिंतित हो गए है। गंगा में धीरे-धीरे बाढ़ की स्थिति बनने लगी है। बाढ़ की दृष्टि से जनपद के अति संवेदनशील कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा सहित कई गांवों में कटान तेजी से होती है। छेछुआ के प्रधान जगदीश सिंह का कहना है कि अब जलस्तर में थोड़ी बढ़ोत्तरी होगी तो कटान शुरू हो जाएगी। वहीं, हरिरामपुर (भुर्रा) के प्रधान गोरखनाथ ने बताया कि मामूली कटान होने लगी है। इलाके में पांच दशक से कटान की समस्या बनी हुई है। कटान के चलते छेछुआ और भुर्रा गांव का रकबा कम हो गया है और कई बड़े काश्तकार अब छोटे किसानों की श्रेणी में आ गए। किसानों का कहना है कि गंगा में बाढ़ आते ही राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि गांवों में पहुंच कर किसानों को आश्वासन तो बहुत देते हैं लेकिन बाद में झांकने तक नहीं आते।