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गुरु का मिला मार्गदर्शन तो हासिल किया मुकाम

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ज्ञानपुर। जिंदगी में बेहतर मुकाम हासिल कर चुके तमाम लोग गुरुजनों की प्रेरणा को जीवन का आधार मानते हैं। उनका कहना है कि गुरुओं की देन ही थी कि जीवन गाड़ी सरपट दौड़ रही है। उनके दिए गुरु मंत्र आज भी काम आते हैं। ऐसे सफल शख्सियतों ने सोमवार को अमर उजाला के साथ जीवन में गुरुजनों की प्रेरणा की अहमियत पर रायशुमारी की। हिंदी फिल्म पिंक, धारावाहिक देवों के देव महादेव और चंद्रनंदिनी जैसे कई फिल्मों और टीवी सीरियलों की पटकथा लिख चुके जिले के चर्चित फिल्म लेखक और साहित्यकार डॉ. अखिलेश मिश्र ‘बोधिसत्व’ जीवन में गुरु की अहमियत को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। सुरियावां ब्लॉक के भिखारीरामपुर गांव निवासी बोधिसत्व ने स्नातक तक की शिक्षा केएनपीजी कॉलेज से ली। इसके बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में मुकाम बनाया। बताते हैं कि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर मैं हमेशा असंतुष्ट रहा। आरंभिक पाठशाला से लेकर आठवीं तक जो शिक्षक मिले अध्यापक कम, शिक्षा विभाग के नौकर अधिक थे। वे शिक्षक की जगह गुरु रहे होते तो हम शायद शिक्षा की जगह ज्ञान पाते। उन सब शिक्षकों के प्रति हार्दिक सम्मान का भाव रखते हुए कहना चाहूंगा कि उनमें से अधिकतर ने शिक्षा के नाम पर सीखने की उत्सुकता का अंत कर दिया। सीख कर मनुष्य बनने से अधिक रट्टू तोता बनाने में उनकी रुचि और दक्षता अधिक थी। वे शिक्षक कम वधिक ज्यादा थे। किंतु उन्हीं शिक्षकों में कुछ थे, जो पाठ्यक्रमों के बाहर झांकने और कुछ अतिरिक्त करने के लिए प्रेरित करते रहे। प्राइमरी कक्षाओं की पढ़ाई अपने गांव भिखारीरामपुर से की, जहां आदित्यनाथ दुबे जी (हरीपट्टी) और मिडिल स्कूल यानी छठवीं से आठवीं पड़ोसी गांव बनकट से की, जहां लक्ष्मी शंकर उपाध्याय जी (मलेपुर) और रूपनारायण यादव जी (कीर्ति पुर) ही ऐसे शिक्षक मिले, जिनको मैं वधिक अध्यापकों में शामिल नहीं करना चाहूंगा। इनमें अपने शिष्यों के प्रति ममत्व शेष था और चाहते थे कि विद्यार्थियों का व्यक्तित्व विकसित हो। रोचक बात यह है कि इनमें लक्ष्मी शंकर उपाध्याय जी अंग्रेजी के अध्यापक थे, लेकिन वे मन से कवि थे। हर हफ्ते शनिवार को वे सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए पूरे स्कूल को एक पेड़ के नीचे इकट्ठा कर लेते और कुछ गाने, अंत्याक्षरी खेलने और स्वरचित कविता (गीत) सुनाने को प्रेरित करते। वे अपने गीत जो किसी प्रसिद्ध गीत की तर्ज पर रचे गए होते थे, सुनाते। लक्ष्मी शंकर जी की प्रेरणा से मैं यह देख पाया कि मैं भी कुछ तुकें मिला सकता हूं। और धीरे धीरे मैं कुछ कविताओं (गीत) जैसा लिखने भी लगा। आगे फिर जब ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए ज्ञानपुर गया तो वहां प्रो. संत बक्श सिंह और प्रो. विभुराम मिश्र जी ने आधुनिक कवियों और कविता से परिचित करवाया। संत बक्श जी कवि केदारनाथ सिंह के बीएचयू में सहपाठी भी थे। विभुराम जी ने कविता की व्याख्या और उसकी सामाजिकता को समझने का हुनर दिया। आज शिक्षक दिवस पर इन गुरुजनों का सादर स्मरण करना चाहूंगा। राजस्थान के बीकानेर निवासी डॉ. चिन्मय हर्ष भदोही के एक निजी अस्पताल के चेयरमैन हैं। शिशु से सातवीं तक पढ़ाई उन्होंने कोतवाली के पीछे स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से की। यहीं पर शिक्षक अवधेश राय ने उन्हें पढ़ाया। शिक्षक अवधेश राय ने जो सीख दी, उसे आज भी वह याद कर गंभीर हो जाते हैं। कहते हैं कि उनके अनुशासन का असर है कि आज मैं डाक्टरी जैसे पेशे के साथ न्याय कर पाने में खुद को सक्षम पाता हूं। हाईस्कूल के बाद 12वीं तक की पढ़ाई के लिए जयपुर चले गए। एमबीबीएस जोधपुर से करने के बाद सायकाट्री में पीजी में ट्रेनिंग के लिए वह लंदन गए। उसके बाद से वे भदोही में लोगों की सेवा में लगे हैं। डीघ के जगापुर निवासी मुकेश कुमार मिश्र बरेली में अधिशासी अधिकारी पद पर तैनात हैं। उनको इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके गुरुजी का खास योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती शिक्षा मातासेवक इंटर कॉलेज बैरीबीसा के शिक्षक सुरेश चंद शुक्ल के मार्गदर्शन में हुई। पढ़ाई के दौरान मेरी लगन को देख उन्होंने स्कूल के बाद घर पर ही नि:शुल्क कोचिंग देना शुरू कर दिया। इंटरमीडिएट के बाद भी मैं उनका मागदर्शन लेता रहा। मिर्जापुर के पहाड़ी ब्लॉक की खंड विकास अधिकारी ऊषा पाल की सफलता में भी गुरुजन का अहम रोल रहा है। भदोही के पिपरिस निवासी एलआईसी अभिकर्ता इंद्रदेव पाल की बेटी ऊषा ने शुरुआती शिक्षा-दीक्षा मूंसी इंटर कॉलेज से ली। केएनपीजी कॉलेज में प्राचीन इतिहास में टॉप करने वाली इस मेधावी छात्रा को प्रवक्ता डॉ. विद्या श्रीवास्तव का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा कि 2013 पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने तक समय-समय पर वह मेरा मार्गदर्शन करती रहीं। उनका कहना था कि अभी नींद भूल जाओ। वह करीब ढाई साल तक जिले के सुरियावां, भदोही और अभोली ब्लॉक में बीडीओ रह चुकी हैं। दुबई के बड़े होटल में एक्जीक्यूटिव मैनेजर के पद काम कर रहे भदोही के देवनाथपुर निवासी इमरान खान विदेश में जिले का मान बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केएनपीजी कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई के दौरान प्रोफेसर डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी से जो मार्गदर्शन मिला, वह पूरे जीवन काम आ रहा है। जब भी मुझे दिक्कत हुई, उन्होंने धुंध दूर किया। यहीं से बीएससी करने के बाद वर्ष 2003 में उनका चयन दुबई के अल अंसार होटल के मैनेजर पद पर हो गया।
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