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निष्काम भक्ति से खुश होते हैं भगवान

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ज्ञिानपुर। नगर के शीला महल परिसर में मंगलवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आरंभ हो गई। वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु पूजन के साथ शुरू हुई कथा के साथ ही कथा स्थल पर भक्ति की बयार बहने लगी। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। कथावाचक अनादि महाराज ने पहले दिन राजा परीक्षित की कथा सुनाई गई। श्रीमदभागवत का महात्म्य बताते हुए उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है। उन्होंने बताया कि पांडवों के वंशज राजा परीक्षित एक बार शिकार के लिए वन में गए थे। वहां श्रृंगी ऋषि तपस्या में लीन थे। हंसी-हंसी में मरे हुए तक्षक नाग को राजा ने श्रृंगी ऋषि के गले में डाल दिया। इस पर ऋषि के पुत्र क्रोधित हो गए और उन्हें शाप दिया कि आज से ठीक सात दिन बाद तक्षक नाग तुम्हें डस लेगा और तुम मृत्यु को प्राप्त होगे। इसके पश्चात राजा परीक्षित मुक्ति का मार्ग खोजने लगे। तब शुकदेव जी महराज ने सात दिनों में उन्हें श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई। यहीं से इस कथा का प्रारंभ होता है। कथा सुनकर दीर्घा में बैठे श्रद्धालु भावविभोर होते रहे। उन्होंने भागवत कथा के महात्म्य के बारे में बताया। इस मौके पर अरुणदत्त त्रिपाठी, साधु पांडेय, ज्ञानधर मिश्रा, सुनीलदत्त, मुन्नू पांडेय आदि मौजूद रहे।
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