मेरा युवा भारत वाराणसी और गृह मंत्रालय के द्वारा आयोजित 17वें सात दिवसीय जनजातीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को हम कौन हैं पर वैज्ञानिक चर्चा हुई। बीएचयू के जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि देश की सभी जातियों और जनजातियों में चार प्रमुख जेनेटिक कंपोनेंट मौजूद हैं। ये चारों हर समुदाय में पाए जाते हैं, लेकिन भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार इनकी मात्रा में अलग अलग है। इसके कारण लोगों का रंग, आकृति, ऊंचाई आदि अलग-अलग दिखते हैं। प्रो. चौबे ने कहा, “लगभग 70,000 वर्ष पहले जब आधुनिक मानव अफ्रीका से निकलकर विश्व भर में फैला, तब उसे सबसे बड़ी चुनौती नई-नई जलवायु और उससे जुड़े नए-नए रोगजनकों की थी। जो जेनेटिक वेरिएंट उस क्षेत्र के रोगों से बेहतर बचाव करते थे, वही पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़े। भारत के चार जेनेटिक कंपोनेंट्स की मात्रा क्षेत्र-विशेष रूप से बदल गई। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम-मध्य भारत में इनकी अनुपातिक भिन्नता ने हमारी बाहरी विविधता को जन्म दिया। इस दौरान वाराणसी के जिला युवा अधिकारी यतेंद्र सिंह, भदोही के जिला युवा अधिकारी रामगोपाल चौहान आदि मौजूद रहे।