सीतामढ़ी। उफनाई गंगा की तेज धाराओं ने कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा गांवों के किसानों की कमर तोड़ना शुरू कर दिया है। बुधवार को सुबह गंगा का जल स्तर 77.790 मीटर दर्ज किया गया। राहत की बात यह है कि जलस्तर इसके बाद आगे नहीं बढ़ा। यहीं ठहर गया। लेकिन कटान जारी रही। इससे किसानों की नींद उड़ी रही। कोनिया इलाके में कटान से किसानों की खेती की जमीन को भारी क्षति हुई है। बाढ़ के पानी की तेज धाराएं किसानों के खेतों को तेजी से रेत रहीं हैं। खास बात यह है कि कोनिया क्षेत्र के सभी गांवों का गंगा से खास नाता है। क्षेत्र के सभी गांव गंगा के तट से संबंध रखते हैं। भदोही जनपद में गंगा का प्रवेश कोनिया क्षेत्र के करवंधिया गांव से होता है। उसके बाद अरई, खेमापुर, महादेवा, दुगुना, परसनी, भटगवां, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, शांतिपुर, बहपुरा, शेरपुर, लखनपुर भदरांव, भभौरी, धनतुलसी, कलातुलसी, हरिरामपुर, गजाधरपुर, भुर्रा, छेछुआ, कलिक मवैया, बसगोती मवैया, मवैयाथान सिंह, इटहरा, सोनपुर, तलवा, डीघ, बनकट, नारेपार, बारीपुर, फुलवरिया, कलिंजरा, गोपालापुर, बेरवां पहाड़पुर, ओझापुर, नगरदह, सेमराध आदि गंगा तटीय गांवों को आबाद करते हुए गंगा बनारस की तरफ निकलती है। ये गांव किसी न किसी रूप से बाढ़ से प्रभावित होते हैं। लेकिन, क्षेत्र का छेछुआ और भुर्रा गांव गंगा कटान की भीषण चपेट में हैं। दोनों गांवों के किसानों की एक हजार बीघे से अधिक खेती की जमीन गंगा में समा चुकी है। बारिस के सीजन में जब गंगा का जल स्तर बढ़ता है और बाढ़ की स्थिति आती है तो तीन ओर से गंगा से घिरे कोनिया में समस्याएं बढ़ने लगती हैं। हालांकि अगर 1978 के भीषण बाढ़ को छोड़ दें तो उसके बाद कभी भी ऐसी समस्याएं नहीं देखी गई, जिससे जन धन को कोई अधिक नुकसान पहुंचा हो। वर्तमान में गंगा कटान तेजी से हो रहा है। बुधवार शाम को जल स्तर 77.790 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ का पानी उड़िया बाबा आश्रम के पास हिलोरें मार रहा है।