ज्ञानपुर। बारिश के मौसम में जिले में मलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। 22 जुलाई से अब तक हुई मरीजों की जांच में 75 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। हालांकि डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज सामने नहीं आए। मलेरिया पीड़ितों के बढ़ते आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है। मलेरिया विभाग की टीमें जगह-जगह दवाओं का छिड़काव करना शुरू कर दी है। पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण से तमाम बीमारी फैलना शुरू हो जाता है। उन्हीं में गंभीर बीमारी मलेरिया भी शामिल है। बारिश के दिनों में ठहरे पानी से उत्पन्न होने वाले मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से यह रोग फैलता है। इसमें ठंड लगकर तेज बुखार आता है। यह एक संक्रामक बुखार है। समय से उपचार न होने पर मरीज की जान पर आफत बन जाती है। जिले में मानसून के साथ मलेरिया ने भी दस्तक दे दिया है। गत एक माह के दौरान 75 पॉजिटीव केस सामने आए। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी में बड़ी संख्या में इसके रोगी पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों के आंकड़ों पर गौर करें तो यह आंकड़ा काफी बढ़ जाता है। 22 जुलाई से लेकर 25 अगस्त तक जिले में 75 पॉजिटीव मिले। मलेरिया विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2017 में 948 मलेरिया के केस सामने आए जबकि आठ डेंगू के संदिग्ध केस मिले। 2017 में जुलाई तक 400 से अधिक केस आए, जिसमें गत तीन माह में ही 342 मरीज मलेरिया से पीड़ित हुए। जिला मलेरिया अधिकारी राम आसरे पाल ने बताया कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का महीना मलेरिया के लिए संवेदनशील होता है। इस समय बारिश का पानी जगह-जगह ठहरता है, जिससे इसके फैलने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि टीम कई चिह्नित स्थानों पर दवाओं का छिड़काव कर रही है। ग्रामीण जले हुए मोबिल या मिट्टी के तेल को भी ठहरे हुए पानी में डालकर मलेरिया के लार्वा को समाप्त कर सकते हैं।