विश्व के कल्याण के लिए चल रहे नौ दिवसीय चंडी महायज्ञ के छठवें दिन सोमवार को दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में यज्ञाचार्य पंडित रमेश महाराज के सानिध्य में 21 वैदिक ब्राह्मणों ने दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्यम) मंत्रों के साथ यज्ञकुंड में आहुतियां डालीं। माता चंडी (देवी दुर्गा) का आह्वान किया गया। यज्ञ से नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं और असाध्य रोगों से मुक्ति पाने तथा मानव के सुख-समृद्धि की कामना की गई। पं. रमेश महाराज ने कहा कि देवी दुर्गा दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली देवी हैं। वैदिक युग में ये ऋषि-मुनियों को कष्ट देने वाले दानवों को अपने तेज से ही नष्ट कर देती थीं। सांसारिक स्वरूप में यह सिंह पर सवार चार भुजाओं वाली सुसज्जित आभा मंडल युक्त देवी हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े आडंबर की जरूरत नहीं है। सच्चे मन से की गई आराधना और भक्ति इन्हें स्वयं ही भक्तों के पास खींच लाती हैं। भजन संध्या में कलाकारों ने भजनों से मां दुर्गा को रिझाया। सात वर्षीय बालिका श्रीदुला की तबला वादन सभी को मोह लिया। पूजन में शिवम दुबे, नीरज उपाध्याय, निशांत कुमार, संजय अग्रहरि, रिशु गिरी रहे।