वाराणसी। फर्जीगिरी के आरोप में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन ने राम प्रकाश शुक्ला की डिग्री निरस्त कर दी है। राम प्रकाश ने विश्वविद्यालय से वर्ष 2004 में शास्त्री व वर्ष 2008 में आचार्य की उपाधि हासिल की थी। इस प्रकार डिग्री हासिल करने के दस साल बाद उपाधि निरस्त की गई है। आरोप है कि इंटर संस्कृत में 40 फीसद अंक होने के बावजूद हेराफेरी कर राम प्रकाश ने कानपुर के बलदेव सहाय संस्कृत महाविद्यालय में दाखिला लिए थे। जबकि विश्वविद्यालय के शास्त्री में दाखिले के लिए इंटर संस्कृत में 45 फीसद अंक अनिवार्य है। इसके लिए उन्होंने जाली अंकपत्र का उपयोग किया। शिकायत के आधार विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच कराई। आरोप सही निकला। इसे देखते हुए परीक्षा समिति ने राम प्रसाद की डिग्री निरस्त करने के साथ ही विविध कार्रवाई की भी की संस्तुति की है।