फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योग और भोग पर गुरु और शिष्य के बीच छिड़ी बहस

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। नागरी नाटक मंडली में रविवार को बोधायन कृत भगवदज्जुकम नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से आध्यात्म और भौतिकता में द्वंद को दर्शाया गया है। जिसमें गुरु और शिष्य शांडिल्य के बीच परस्पर योग और भोग की बहस छिड़ी रहती है। गुरु विधा, अध्ययन, योग पर बल देते हैं, तो शिष्य भोजन लोभ ,प्रेम और चंचलता की ओर भागता है। प्रसंग में आगे यमदूत शिष्य शांडिल्य जिसको देखकर मोहित होते रहते हैं उस गणिका वसंत सेना के प्राण ले लेते हैं। शांडिल्य के हठ करने पर गुरु योग साधना द्वारा अपने प्राण वसन्तसेना की देह में प्रवेश करा देते हैं । यमदूत द्वारा अपने भ्रम का बोध होने पर वो गणिका के प्राण कुछ देर के लिऐ गुरु की मृत देह में प्रवेश करवा कर अन्यत्र कार्य के लिये निकल जाता है । इसके बाद जो नाटकीय घटनाओं का क्रम चलता है वह बहुत ही रोचक हैं । कलाकारों की जींवत प्रस्तुति को देखकर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। संयोजन नेशनल स्कूल ऑफ ड्राम के राम जी बाली का रहा। इसके बाद कलाकारों को सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें