सीतामढ़ी। तेजी से बढ़ रही गंगा का जल स्तर बृहस्पतिवार से स्थिर हो गया है। बावजूद इसके कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा गांवों में कटान जारी है। पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से गंगा में हो रही कटान किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इससे धीरे-धीरे जहां कृषि भूमि का रकबा घटता जा रहा है, वहीं तमाम किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी कार्यालय के अनुसार शाम को पांच बजे गंगा का जलस्तर 73.800 मीटर रिकॉर्ड किया गया। एक दिन पहले बुधवार को भी यही आंकड़ा था लेकिन कटान में कभी नहीं आई। किसानों का कहना है कि बाढ़ के समय हर वर्ष कुछ न कुछ जमीन गंगा की धारा में समा जाती है। खास बात यह है कि हर वर्ष जितना रकबा छेछुआ और भुर्रा का कम हो जाता है, उतना गंगा पार मिर्जापुर जिले के चेहरा गांव और इलाहाबाद के बामपुर गांव के किसानों का कृषि रकबा बढ़ जाता है। उल्लेखनीय है कि जनपद का कोनिया क्षेत्र तीन ओर गंगा से घिरा हुआ है। क्षेत्र की हर ग्रामसभा का नाता गंगा से जुड़ा है। वैसे तो कोनिया क्षेत्र में समस्याओं अंबार है, लेकिन गंगा कटान और बाढ़ प्रमुख समस्या बन चली है। किसानों का कहना है कि गंगा कटान के चलते सैकड़ों बीघे उपजाऊ भूमि गंगा की धारा में विलीन हो चुकी है। पांच दशक में कितने नेताओं और अधिकारियों ने कटान रोकने के लिए आश्वासन दिए, लेकिन इस समस्या से किसानों को राहत देने के लिए कोई कुछ नहीं कर सका। इस कारण किसानों का विश्वास अब नेताओं और अधिकारियों से उठ गया है।