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चाईनीज राखियों से टूट रहा मोह

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ज्ञानपुर। भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन के त्योहार को लेकर जिले के बाजारों में सभी दुकानों पर राखियों के स्टॉल सज चुके हैं। बाजार में राखियों की बिक्री शुरू हो चुकी है। घरों से दूर रहने वाले भाइयों के लिए बहनों ने राखियां खरीद कर उसे भेजना शुरू कर दिया है। चाईनीज के बजाए स्वदेशी राखी महिलाओं को अधिक भा रही है। मोती जड़ित राखियों की डिमांड अधिक है। इंटरनेट के इस युग में भाई-बहन दूर रहकर भी आपस में बातें कर ले रहे हैं, लेकिन राखी भेजने और घर में भाई की कलाई पर बांधने का सिलसिला सदियों से आज भी उसी पारंपरिक ढंग से जारी है। बहन अपने भाई के प्रति उसकी कलाई पर राखी बांध कर अपना प्रेम जताती है और उससे अपनी रक्षा का संकल्प लेती है। वहीं, भाई भी इसके बदले में अपने प्रेम को जताते हुए उपहार देता है। अमूमन हर पर्व पर चाइनीज सामान लोगों की पहली पसंद होता है, लेकिन इस बार नजारा उल्टा है। गिने-चुने स्टॉलों पर ही बच्चों के लिए चाइनीज राखियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा पूरे बाजार में स्वदेशी राखियां ही दिख रही हैं। ग्राहक भी स्वदेशी राखी को ही खरीद रहे हैं। मोती जड़ित राखियों की अधिक डिमांड हो रही है। राखी में सफेद मोतियों के अलावा नीले, पीले, हरे मोतियों का भी शानदार तरीके से इस्तेमाल किया गया है। इस बार खास बात यह है कि एक ही वैरायटी कई दामों और साइज में उपलब्ध हैं। यदि बड़े मोर पंख वाली राखी 70 रुपये से शुरू है तो उसी में छोटी राखी की कीमत 30 से 35 रुपये है। इसी तरह ज्यादा मोतियों वाली राखी की कीमत 40 रुपये से शुरू है, जबकि इसी में छोटी राखी का दाम 15 से 20 रुपये है।
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