वाराणसी। भैया दूज पर भाईयों को दाना-मिठाई खिलाने वाली बहनें डिजाइनर भड़ेहर को सजाने-संवारने में जुटी हैं। बाजार में भी कई रंगों के भड़ेहरों की भरमार है। नीचे कसोरा होता है। इसके ऊपर एक बड़ा कलश, इसके बाद छोटा कलश और इससे उपर एक और छोटा कलश रखा गया है। सबसे ऊपर छोटा बंद गुंबद वाला कलश है। इन्हीं कलशों में दाना और मिठाई के अलावा चीनी का घरिया रखकर भाई को भैया दूज पर खिलाया जाता है। भाई के लंबी आयु की कामना बहनें करती हैं। पहले यह पकी मिट्टी के रंग का ही होता था लेकिन अब यह लाल, सिल्वर, हरा और नीले रंग का भड़ेहर बन रहा है। इसे गोटा और लेस से सजाया जा रहा है। बाजार में इसकी कीमत भी 20 रुपये से लेकर 80 रुपये तक है। महमूरगंज, लंका, भोजूबीर, पांडेयपुर, चौक, दशाश्वमेध, चेतगंज आदि इलाकों में भड़ेहर की एक से बढ़कर एक वेरायिटी मौजूद है।