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तेरस पर शिव आराधना से पूरी होती हैं मुरादें

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ज्ञानपुुर। सावन माह तेरस के दिन शिवालयों में कांवरियों के साथ अन्य शिवभक्तों का भारी जन सैलाब उमड़ता है। इस दिन भगवान शिव को जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। मान्यता के अनुुसार इस दिन भगवान भोले शंकर अत्यधिक प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। बृहस्पतिवार को तेरस के दिन दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन माह के तेरस के दिन भगवान शिव को जलाभिषेक करने का विशेेष महत्व होता है। पुराणों के अनुुसार इस दिन शिव को जलाभिषेक और पूजन करने से शिव और शक्ति दोनों वरदान एक साथ प्राप्त हो जाता है। इससे मनुष्य को दैविक, दैहिक और भौतिक तीनो कष्ट से मुक्ति मिल जाती है। गोपीगंज स्थित बाबा बड़े शिव मंदिर के पुजारी मिठाई लाल ने बताया की सावन के तेरस पर जलाभिषेक और पूजन का विशेष महत्व इसलिए भी है कि इस दिन संध्या के समय भगवान शिव माता पार्वती के समक्ष नृत्य करते हैं। इस दिन वह अत्यंत खुशी के कारण भक्तों को मन चाही मुराद देते हैं। वहीं तेरस के दिन जल इनकों जल चढ़ाने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होते हैं। जिसके कारण खाशकर सावन के तेरस के दिन देवाधिदेव महादेव का रंग बिरंगे सुगंधित पुष्पों से भव्य हरियाली युक्त शृंगार किया जाता है। इस बार भी ज्ञानपुर नगर स्थित बाबा बाबा हरिहर नाथ मंदिर, गोपीगंज स्थित बाबा बड़े शिव मंदिर, तिलेश्वरनाथ, भवानीपुर स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर समेत अन्य प्रमुख शिव मंदिरों प्रतिवर्ष सावन के तेरस पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
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