रामनगर की रामलीला: प्रभु राम को देखते ही जमीन पर गिर पड़े भरत, नंगे पांव दौड़े भगवन
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भरत गुरु की आज्ञा लेकर शत्रुघ्न और निषादराज के साथ श्रीराम से मिलने गए। प्रभु श्रीराम को देखते ही भरत जमीन पर गिर पड़े। यह देख राम नंगे पांव दौड़े और भरत को उठाकर गले लगा लिया। चित्रकूट में चारों भाइयों का मिलन देखकर लीला प्रेमियों की आंखें सजल हुईं। यह मंचन रामनगर की रामलीला के 13वें दिन मंगलवार को भरत का यमुनावतरण, ग्रामवासियों से मिलन और श्रीरामचंद्र दर्शन की लीला के दौरान हुआ।
चतुरंगिणी सेना को जवानों ने दी गई सलामी
भरत की चतुरंगिणी सेना के सेनापति के रूप में काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह साथ चलते हैं। परंपरानुसार पीएसी की सशस्त्र टुकड़ी ने उनके लीला स्थल पहुंचने पर उन्हें सलामी दी। अपनी बाघंबरी बग्घी पर खड़े होकर बतौर चतुरंगिणी सेना के सेनापति उन्होंने सलामी ली। सेना में हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सेना होती है।
कैकेयी ने मांगे वर, भरत को राजगद्दी और राम को मिला वनवास
श्री आदि लाट भैरव रामलीला की लीला का तीसरे दिन जब कैकेयी के हठ से भरत को अयोध्या का राजा बनाने के साथ ही राम को चौदह वर्ष का वनवास मिला। इससे पूरी अयोध्या कराह उठी। लीला के अंत में आरती हुई। इस मौके पर समिति के व्यास दयाशंकर त्रिपाठी, प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव, केवल कुशवाहा, गोविंद, रामप्रसाद, धर्मेंद्र शाह आदि रहे।