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दबा दी गई साल लाख की अनियमितता की फाइल

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ज्ञानपुर। राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना (एनसीएलपी) के तहत जिले में 2011 से 2015 तक संचालित 35 बालश्रम विद्यालयों में सवा सात लाख की अनियमितता की फाइल को दबा दिया गया है। 2016 में डीएम की जांच आख्या पर विशेष सचिव श्रम ने दो अधिकारियों और दो कर्मचारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा है। जिले में कालीन का कारोबार होने की वजह से यहां बड़ी संख्या में बाल श्रमिक शिक्षा से दूर हो जाते हैं। बाल श्रमिकों और श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए 2011 में 35 बालश्रम विद्यालय खोले गए थे जो, 2015 तक संचालित हुए थे। इन विद्यालयों में मानदेय, छात्रवृत्ति और किराए आदि में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गई थीं। शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों में भी गड़बड़ी मिली थी। इसकी शिकायतें मिलने पर तत्कालीन डीएम चंद्रकांत पांडेय ने जांच कराई तो कई खामियां मिलीं। अनुदेशकों संग कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर मानदेय, छात्रवृत्ति और भवनों के किराए में करीब सात लाख 23 हजार की वित्तीय अनियमिता सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष सचिव श्रम परशुराम प्रसाद ने एक जून 2016 को आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि तत्कालीन परियोजना निदेशक पंकज सिंह राणा, प्रभारी सहायक श्रमायुक्त आरके पाठक, लेखाकार ओमकार और फील्ड आफिसर इंद्रजीत प्रकरण में दोषी हैं, इनके खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट दें, लेकिन तत्कालीन डीएम के स्तर से कार्रवाई नहीं हो पाई। उसके बाद उनका स्थानांतरण होने पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। मामले की शिकायत करने वाले अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने कहा कि पुराने अधिकारियों की कृपा से इस प्रकरण में हाथ काले करने के आरोपी कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि मामला अब तक मेरे संज्ञान में नहीं आया है। फाइल मंगवाकर दिखवाया जाएगा।
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