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छुट्टी के बाद खुले सरकारी स्कूलों में नहीं दिखीं तैयारियां

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ज्ञानपुर। करीब डेढ़ महीने के ग्रीष्मावकाश के बाद सोमवार को परिषदीय और कान्वेंट स्कूल खुल गए। पहले ही दिन स्कूलों में जहां उपस्थिति धड़ाम हो गई, वहीं अव्यवस्थाएं हावी रहीं। सीमावर्ती तमाम स्कूलों के जहां ताले नहीं खुले, वहीं अन्य स्कूलों में नाममात्र के ही बच्चे दिखे। परिसर में कूड़ा-करकट और गंदगी का अंबार दिखा। जो स्कूल खुले वह समय से पहले ही बंद हो गए। दूसरी ओर पहले दिन स्कूल पहुंचे बच्चों का पहला दिन खेलने-कूदने में ही बीता। लंबे अवकाश के बाद जुलाई में खुले स्कूलों में पहले दिन ही जिले के परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में दुर्व्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। कक्षाओं मेें अस्त-व्यस्त और गंदे फर्नीचर, स्कूल परिसर में गंदगी और घास देखने को मिली। सोमवार को अधिसंख्य विद्यालयोें में 10 से 15 फीसदी छात्र ही उपस्थित हुए। जिले के कुल 1143 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 1.28 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें से पहले दिन कुल मिलाकर 15 से 18 हजार बच्चे ही स्कूल पहुंचे। स्कूलों में बच्चों का पहला दिन मौज मस्ती में ही गुजर गया। नतीजतन इन स्कूलों के बच्चे अपने कक्षाध्यापकों को ढूंढते नजर आए। डीघ के छेछुआ, भुर्रा, सेमराध, दुर्गागंज, सुरियावां, चौरी, औराई के सीमावर्ती इलाकों के विद्यालयों के ताले भी नहीं खुले। जो स्कूल खुले वहां बच्चे गिनती के रहे। गिने-चुने शिक्षक भी पहुंचे। करीब डेढ़ माह के अवकाश की खुमारी बच्चों संग शिक्षकों पर भी दिखी। स्कूल के नजदीक के बच्चे तो पुराने बैग और किताब लेकर पहुंच गए, लेकिन जिन बच्चों का प्रवेश इस सत्र में हुआ है, वह खाली हाथ ही आए। कक्षाध्यापकों के न आने से वह पढ़ाई के बजाए खेलने में ही मशगूल रहे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि पहले दिन कुछ दिक्कतें होती हैं। जल्द ही स्कूलों में पठन-पाठन पटरी पर आ जाएगी। उन्होंने चेताया कि जो शिक्षक नहीं आ रहे हैं वह स्कूलों पर समय से पहुंचे। निरीक्षण में अनुपस्थित मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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