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कछार में परवल की खेती से मोटी कमाई

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सीतामढ़ी। गंगा के कछार सब्जी की फसल से लहलहाने लगे हैं। परवल समेत अन्य सब्जियों की खेती कर किसान और ठेकेदार यहां मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। ठेके पर जमीन लेकर बेहद कम लागत में तैयार यहां की सब्जियों कछवां मंडी के जरिये पूर्वांचल के विभिन्न जिलों तक पहुंचाया जाता है। परवल की फसल उग आई है। तीन ओर गंगा से घिरे जिले के कोनिया क्षेत्र के गंगा के कछार में बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन कर किसान मालामाल हो रहे हैं। यहां की सब्जियां पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों के रसोइयों तक कछवां मंडी के माध्यम से पहुंचती हैं। वैसे तो गंगा कटान के चलते कोनिया क्षेत्र के कई गांवों के किसान चिंतित रहते हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से कछार में सब्जी की भरपूर पैदावार से कछार में सोना उगने लगा है। इसका यहां के किसान भरपूर फायदा उठा रहे हैं। यह बात दीगर है कि कोनिया के किसान आराम तलब हैं और मेहनत से दूर भागते हैं। और महज 10 से 15 हजार रुपये प्रति बीघे की दर से गंगा का कछार गाजीपुर के ठेकेदारों को किराये पर देकर चैन की बंशी बजाते हैं। इसका फायदा ठेकेदार उठाते हैं। कोनिया के लगभग एक हजार बीघे गंगा कछार में गाजीपुर के ठेकेदार बड़े पैमाने पर परवल की खेती करते हैं। इसके साथ करेला, भिंडी, नेनुआ आदि सब्जी की खेती भी होती है, जो इस समय कछार में लहलहाने लगी है। वर्तमान में परवल उत्पादन शुरू हो गया है। ग्रामीण बताते हैं कि कोनिया के कछार से पैदा की गईं सब्जियां ट्रकों के माध्यम से कछवां मंडी में भेजी जाती हैं। परवल की खेती में लागत काफी कम आती है और फरवरी से शुरू हुआ उत्पादन गंगा की बाढ़ तक जारी रहता है। हालांकि कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने की लालच में ठेकेदार सब्जियों पर खतरनाक कीटनाशकों का प्रयोग भी धड़ल्ले से कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते। कोनिया क्षेत्र के किसान कृष्णा सिंह कहते हैं कि गंगा के कछार की मिट्टी में न तो खाद की जरूरत होती है न ही ज्यादा पानी की। डीघ के बसंत लाल और गणेश कुमार ने बताया कि कछार में जमीन लेने के लिए सब्जी ठेकेदारों में होड़ मची रहती है। इससे किसानों की आमदनी हर साल बढ़ जाती है।
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