वाराणसी। केंद्र सरकार रेलवे का निजीकरण करना चाहती है लेकिन यह मंशा कभी पूरी नहीं होने दी जाएगी। सरकार के इस कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा। शुक्रवार को लहरतारा स्थित डीआरएम कार्यालय के सामने आयोजित पूर्वोत्तर रेलवे की महासभा में संगठन के नेताओं ने ये बातें कहीं। इस अवसर पर कर्मचारी समस्याओं के निराकरण और संगठन की मजबूती के लिए संघर्ष का एलान किया गया। महासभा को नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे (एनएफआईआर) के अध्यक्ष गुमान सिंह, महामंत्री डॉ. एम राघवैया व संयुक्त महामंत्री बीसी शर्मा ने संबोधित किया। महामंत्री ने कहा कि रेल कर्मचारियों की सेवा और उनके उन्नयन के लिए संगठन सदैव तत्पर रहेगा। अन्य वक्ताओं ने कहा कि रिमोट एरिया में तैनात दो लाख कर्मचारी 12 घंटे की ड्यूटी करते हैं लेकिन उन्हें मुकम्मल सुविधाएं नहीं मिलतीं। इस दौरान टेकिभनशियन द्वितीय के पदों को टेकिभनशियन प्रथम में समायोजित करने, लोको इंस्पेक्टर के वेतन बढ़ाने आदि की भी मांग की गई है। इस मौके पर मांग उठी कि वेज रिवीजन प्रत्येक पांच वर्ष में हो और सभी कर्मचारियों को उनके संपूर्ण सेवाकाल में कम से कम पांच प्रमोशन मिलें। इससे पहले कर्मचारियों ने पदयात्रा निकाली। संचालन कार्यकारी अध्यक्ष पीआरकेएस व जोनल सचिव रमेश मिश्र ने किया। इस दौरान लखनऊ मंडल के अध्यक्ष एल श्रीवास्तव, मंत्री रवि भूषण सिन्हा, शाखा सचिव विंध्यवासिनी यादव, तारक नाथ, गजेंद्र सिंह, एसहुसैन और मीडिया प्रभारी डॉ. रत्नेश कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।