बीएचयू के वेद विभाग की ओर से आयोजित श्राद्ध-कर्म विमर्श विषय पर 10 दिन की कार्यशाला का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के गोष्ठी कक्ष में मुख्य वक्ता आचार्य राममूर्ति चतुर्वेदी ने कहा कि जैसे देव कार्यों में मनुष्य लगा रहता है, वैसे ही पितृ कार्यों में भी श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान करना चाहिए। यह सनातन धर्म का श्रद्धा से जुड़ा हुआ अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें कि आज धीरे-धीरे गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि आज श्राद्ध कर्म के ज्ञाता बहुत कम रह गए हैं। कार्यशाला का संचालन डॉ. नारायण प्रसाद भट्टाराई, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. पतंजलि मिश्र ने किया। कार्यशाला में लगभग 50 प्रतिभागी आए।