आशा बहनों से मुलाकात करतीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा।
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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने तरीके से माहौल बनाना शुरू कर दिया है। कहीं यात्राएं निकल रही हैं तो कहीं रैलियों के जरिए वोटरों को साधा जा रहा है। यह चुनाव प्रियंका गांधी के लिए एक बड़ी चुनौती है। वे अपना हर कदम बहुत सोच समझकर रख रही हैं। उत्तरप्रदेश में प्रियंका गांधी का मुख्य फोकस यूपी की महिलाएं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में महिला वोटरों की संख्या 64613751 थी। इनमें से 40905867 महिलाओं ने वोट दिया था। प्रियंका का लक्षय अब यही महिलाएं हैं। यदि इन्हें प्रियंका की बात समझ में आ गई तो यूपी में 2017 के चुनाव में 5416540 वोट लेकर सात सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी को दोबारा से उठने का मौका मिल सकता है। उनका प्रयास है कि 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' से जब एक परिवार की सोच बदलेगी तो चुनाव परिणाम बदलने में भी देर नहीं लगेगी।
अपनाई केजरीवाल की दिल्ली वाली रणनीति
यूपी के 2017 विधानसभा चुनाव में 45570326 पुरुष वोटरों और 40905867 महिलाओं ने वोट डाला था। कांग्रेस पार्टी ने 403 में से 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से उसे सात सीटों पर जीत मिली, जबकि 29 पर जमानत जब्त हो गई। साल 2017 के चुनाव में कुल 86728324 वोट पड़े थे, जिसमें से कांग्रेस ने 5416540 वोट लिए थे। कुल मतों में कांग्रेस का प्रतिशत 6.25 रहा था। प्रियंका गांधी ने इस बार जो चुनावी रणनीति तैयार की है, उसमें कई बातों का समावेश है। जिस तरह से दिल्ली में अपने पहले दो चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने दूसरी पार्टियों की तरह सामान्य मतदाता पर फोकस करने की बजाए, परिवार के सदस्यों पर बात की थी। परिवार की महिलाओं और यूथ पर खास ध्यान दिया था। उनके लिए वे क्या करेंगे, इसी को चुनावी मुद्दा बना दिया था। सामान्य मुद्दों में फ्री बिजली-पानी जैसी घोषणाएं भी की गई। उस वक्त राजनीतिक जानकारों ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने 'राजनीति और मतदान व्यवहार' को लेकर परिवारों में विभाजन कर दिया है। एक परिवार में वोट देने की वजह बंट चुकी थी।
निकाल रहीं भाजपा के हिंदुत्व का तोड़
प्रियंका गांधी ने भी अब उसी तरह बहुआयामी तरीके से चुनाव प्रचार शुरू किया है। उन्हें भाजपा के हिंदुत्व का तोड़ निकालना है तो वे मंदिर जा रही हैं। पूजा अर्चना कर रही हैं। महिलाओं, स्कूलों और युवाओं पर बात कर रही हैं। उन्होंने अपना खास ध्यान महिलाओं पर लगाया है। उन्हें विधानसभा चुनाव में चालीस फीसदी टिकट देने की घोषणा की है। वे 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' पर नियमित तौर से संवाद कर रही हैं। चित्रकूट के एतिहासिक मत्तगजेंद्र शिव मंदिर में पूजन अर्चना करने के बाद जब प्रियंका ने आम लोगों के साथ संवाद किया तो कहा, 'सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो, अब गोविंद ना आएंगे, कब तक आस लगाओगी तुम...। उन्होंने कहा कि इस बार 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने की बात तो एक शुरुआत है। मैं चाहती हूं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं की आधी आबादी पचास फीसदी सीटों पर लड़े। इसके लिए उन्हें अभी से तैयारी करनी होगी।
महिला अपराधों को बना रहीं मुद्दा
प्रियंका गांधी ने महिलाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए उनके साथ हो रहे अपराध के मुद्दों को भी लगातार उठाया है। इसके लिए वे अखबारों की कतरनें ट्वीट करती रहती हैं। पिछले दिनों उन्होंने झपटमारी की घटनाओं को लेकर भी एक खबर ट्वीट की थी। आशा वर्करों के बारे में प्रियंका ने कहा, उन्हें पीटा जा रहा है, उनका शोषण हो रहा है। अगर वे पीटने वालों से अपना हक मांगेंगी तो उन्हें कभी नहीं मिलेगा। उन्हें अपने हक के लिए लड़ना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश के हर जिले में 75 पाठशालाएं होंगी। ये पाठशालाएं केंद्रीय विद्यालय की तरह होंगी, प्रियंका गांधी महिलाओं को ऐसा भरोसा दिलाती हैं। वे कहती हैं कि राजनीति में हिंसा, क्रूरता, अत्याचार और शोषण को खत्म करने के लिए महिलाओं का आगे आना बहुत जरूरी है। कांग्रेस महासचिव ने कहा, मैं आजादी के आंदोलन के 'करो या मरो' के नारे को पुनर्जीवित करना चाहती हूं। कांग्रेस के हर एक पदाधिकारी-कार्यकर्ता को मजबूती से इस लड़ाई को लड़ना है।