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उत्तर प्रदेश से ग्राउंड रिपोर्ट: प्रधानमंत्री ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों से नहीं निभाया यह वादा, बेरोजगारी बनी हुई है बड़ा मुद्दा

Mon, 20 Dec 2021 11:46 AM IST
Harendra Chaudhary प्रयागराज से अमित शर्मा की रिपोर्ट।

सार

विश्वविद्यालय के छात्र विपुल तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि जैसे ही बात रोजगार और महंगाई की आती है, सरकार की योजनाओं की चमक फीकी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि अब लोगों को धर्म और संप्रदाय की राजनीति से आगे बढ़कर रोजगार और विकास की राजनीति पर वोट देना चाहिए...
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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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पूर्वांचल में शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों को अभी भी इस बात का कष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में उनसे किया गया वादा अभी तक नहीं निभाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय अपने चुनाव प्रचार के दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए स्पोर्ट्स ग्राउंड बनाने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, छात्रों के लिए हॉस्टल नहीं है जिसके कारण उन्हें अन्य स्थानों पर महंगा किराया चुका कर रहना पड़ता है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस समस्या को समाप्त करने के लिए अब तक कोई गंभीर कदम नहीं उठा सका है। हालांकि, इसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं।

धर्म और संप्रदाय की राजनीति से बाहर निकलें लोग

विश्वविद्यालय के छात्र विपुल तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत काम किया है। इससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता। सड़कें, फ्लाईओवर और चौराहे हर जगह विकास का काम हुआ है। लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है, लेकिन जैसे ही बात रोजगार और महंगाई की आती है, सरकार की योजनाओं की चमक फीकी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि अब लोगों को धर्म और संप्रदाय की राजनीति से आगे बढ़कर रोजगार और विकास की राजनीति पर वोट देना चाहिए।

लेकिन रोज़गार के सवाल पर चिंता बरकरार

युवाओं के बीच रोजगार के लिए उपयुक्त योग्यता भी बहस का विषय है। छात्रों को नए समय की योग्यता के अनुरूप अपने आप को ढालने की चिंता भी है। पारंपरिक शिक्षा पद्धति से नए जमाने में रोजगार की चिंताओं को दूर नहीं किया जा सकता, इस बात से छात्र परिचित हैं और शिक्षा नीति में नई चुनौतियों के अनुसार उचित बदलाव होने की उम्मीद भी कर रहे हैं।

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शोध छात्र हरबंस सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन उसके हिसाब से सुविधाएं नहीं हैं। इस कारण छात्रों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलकर इन समस्याओं का हल निकालना चाहिए।

योगी सरकार से छात्रों का एक वर्ग नाराज

छात्रों का एक वर्ग योगी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है। उसे लगता है कि इस सरकार में एक वर्ग विशेष को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि सरकार को हर वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। इन छात्रों ने कहा कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव उसके लिए ज्यादा बेहतर विकल्प हैं। वे इस चुनाव में बदलाव के लिए मतदान करेंगे।

विकास के काम से संतुष्ट हैं लोग

जीआईसी के पूर्व प्रवक्ता आरएल यादव ने कहा कि सरकार ने पांच साल में प्रयागराज की शक्ल बदल दी है। हर तरफ विकास कार्य हुआ है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन क्योंकि पूरे प्रदेश से और कई अन्य राज्यों से भी छात्र यहां पर शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं, इसलिए उनके दिमाग में रोजगार ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है, जो होनी भी चाहिए। यही कारण है कि इस चुनाव में रोजगार ज्यादा बड़ा मुद्दा बन कर उभर सकता है।  

एलनगंज में पूजा कोचिंग सेंटर चलाने वाले पंकज यादव ने कहा कि सरकार ने शहर का विकास करने में कोई कमी नहीं रख छोड़ी है। धर्म और सांप्रदायिक राजनीति से ऊपर उठते हुए सरकार ने सड़कों के चौड़ीकरण और शहर के सुंदरीकरण का काम किया है। कोई अन्य सरकार इस तरह का साहस नहीं दिखा पाती थी, क्योंकि इसके लिए अनेक घरों को तोड़ना पड़ता है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने गुंडों पर जिस तरह कठोर कार्रवाई की है उससे उनकी छवि मजबूत हुई है।

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