उन्नाव। बांगरमऊ व बीघापुर तहसील में जल्द ही ग्राम न्यायालय की स्थापना की जाएगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसके लिए जनपद न्यायाधीश को आदेशित किया है। जिला जज ने जनपद न्यायालय के पीठासीन अधिकारियों को दोनों तहसीलों के लंबित दीवानी व फौजदारी के मुकदमों की संख्या कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा है। इससे पहले जनपद में हसनगंज तहसील स्थित ग्राम न्यायालय सुचारु रूप से चल रहा है।
बांगरमऊ और बीघापुर में ग्राम न्यायालय न होने से वादियों को जिला मुख्यालय आना पड़ता है। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कत होती है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 में दर्शित प्रथम व द्वितीय अनुसूची के अंतर्गत आने वाली दोनों तहसीलों में ग्राम न्यायालय की स्थापना के लिए जिला जज से रिपोर्ट मांगी है। इस पर जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव ने जनपद न्यायालय के पीठासीन अधिकारियों से संबंधित दीवानी व फौजदारी के वादों की अलग-अलग संख्या की जानकारी मांगी है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेजी जाएगी। अभी जनपद की तहसील पुरवा व सफीपुर में मुंसिफ न्यायालय और तहसील हसनगंज में ग्राम न्यायालय चल रहा है। सफीपुर मुंसिफ न्यायालय की शुरुआत के बाद बार एसोसिएशन उन्नाव के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कई दिनों तक न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया था। बार की कार्यकारिणी के तत्कालीन अध्यक्ष व महामंत्री इस संबंध में हाईकोर्ट के प्रशासनिक अधिकारियों से मिले लेकिन बात बेनतीजा रही थी। बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामसुमेर ने ऐसे किसी आदेश की जानकारी से इंकार किया है। बताया कि जिला जज से मिलकर जानकारी की जाएगी।