21 साल बाद विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट ने दिया फैसला
कोर्ट ने दोषियों में प्रत्येक पर 26-26 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। उधार दिए रुपये मांगने पर युवक की हत्या करने वाले तीन दोषियों को विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। घटना 21 साल पहले हुई थी। कोर्ट ने दोषियों पर 26-26 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के मंशाखेड़ा गांव निवासी दिनेश कुमार ने आठ नवंबर-2002 को छोटे भाई मुकेश कुमार के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी। युवक के परिजन उसकी तलाश में जुटे थे। चार दिन बाद 12 नंवंबर को गांव वालों से जानकारी हुई कि छुन्नू पंडित के पीछे बने सीवर टैंक में एक शव पड़ा है।
वह पुलिस के साथ मौके पर पहुंचा। शव को सीवर टैंक से निकाला गया। इस दौरान युवक के चाचा रामआसरे व मामा रामसुमेर को बुलाया गया। शव व कपड़े देखकर शव लापता मुकेश का होने की जानकारी हुई। हरकत में आई पुलिस ने दिनेश कुमार की तहरीर पर छानबीन शुरू की। दिनेश ने आरोप लगाया कि चंद्रभान ने उसके भाई से रुपये उधार लिए थे।
वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी थी। दिनेश ने की भाई हत्या में गंगाघाट कोतावाली के मंशा खेड़ा गांव निवासी चंद्रभान, मनोज और रामनगर निवासी शिवकुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच-पड़ताल के बाद पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था। मुकदमे की विवेचना तत्कालीन सीओ सिटी रहे आशुतोष शुक्ला ने की और 2003 में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
मुकदमा विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में विचाराधीन था। सोमवार को मुकदमे की अंतिम सुनवाई में विशेष लोक अभियोजक जगन्नाथ प्रसाद कुशवाहा व मनोज पांडेय की दलीलों और पुलिस की ओर से पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायाधीश मोहम्मद असलम सिद्दकी ने तीनों को हत्या का दोषी पाया। चंद्रभान , मनोज व शिवकुमार को सजा सुनाई। न्यायाधीश ने तीनों पर अर्थदंड भी लगाया है।